कोर्ट ने मामले में उत्तर प्रदेश सरकार सहित सभी प्रतिवादियों से दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब हलफनामे पर दाखिल करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार की खंडपीठ ने दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नकली प्रोडक्ट की बिक्री के आरोप में आगरा जिले लोहामंडी थाने में दर्ज एफआईआर में मेसर्स फ्लिकॉर्ट इंटरनेट प्राईवेट लिमिटेड को राहत दे दी है। कोर्ट ने कहा है कि अगले आदेश तक याची के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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कोर्ट ने मामले में उत्तर प्रदेश सरकार सहित सभी प्रतिवादियों से दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब हलफनामे पर दाखिल करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार की खंडपीठ ने दिया है।
मामले में याची के खिलाफ कॉपीराइट एक्ट 1957 के उल्लंघन और आईपीसी की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है। उस पर आरोप लगाया गया है कि वह नकली प्रोडक्ट बेच रहा है। याची के अधिवक्ता उदय ने कोर्ट के समक्ष कहा कि फ्लिपकार्ट ई-कामर्स साइट है। जो लेखों, पुस्तकों की बिक्री और खरीद के लिए प्लेटफार्म प्रदान करता है।
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कॉपीराइट के उल्लंघन में नकली प्रोडक्ट बनाने वाले के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है न कि प्लेटफार्म प्रदान करने वाली साइट के खिलाफ। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 याची को संरक्षण प्रदान करती है। निवेदन यह है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने कहा कि इस बात पर विचार करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने याची को जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया है।