रिश्ता गवाह की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाला कारक नहीं: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी का अपने कमरे में जाना शिकायतकर्ता (वादी मुकदमा) और उसके परिवार के सदस्यों को देखने के बाद और उसके कमरे को बंद करना साक्ष्य अधिनियम की धारा आठ के तहत एक प्रासंगिक तथ्य था, जिससे इंगित होता है कि आरोपी अपराध का दोषी है। आरोपी की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई कि मामले में दोनों गवाह पीड़िता के रिश्तेदार हैं। इसलिए उनकी गवाही पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि गवाह मृतक केपरिवार के सदस्य होने के नाते आरोपी को झूठा फंसाने की संभावना रखते हैं। यह मामले में आधार नहीं हो सकता है और इस आधार पर उनके साक्ष्य को खारिज नहीं किया जा सकता है।
रिश्ते एक गवाह की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाला कारक नहीं है। अक्सर ऐसा नहीं होता है कि एक रिश्ता वास्तविक अपराधी को छुपाता नहीं है और एक निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगाता है। कोर्ट ने कहा कि परिवार के सदस्यों की गवाह के रूप में जांच करने पर कानून में कोई रोक नहीं है। घटना ऐसी जगह पर हुई जहां स्वतंत्र गवाह उपलब्ध नहीं हो सकता है। रिश्तेदार ही गवाह हो सकते हैं। कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए सत्र न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दिया।