कहा कि अपीलकर्ता बरी होने का हकदार है। याची की अपील स्वीकार की जाती है। मृत्युदंड की पुष्टि के लिए निचली अदालत द्वारा भेजा गया संदर्भ खारिज किया जाता है। याची को उन सभी आरोपों से बरी किया जाता है, जिसके लिए उस पर मुकदमा चलाया गया और उसे दोषी ठहराया गया। सीआरपीसी की धारा 437 (ए) के प्रावधानों के तहत याची को तत्काल जेल से रिहा किया जाए।
मामला रामपुर शहर का है। याची पर आरोप है कि उसने छह वर्ष की बच्ची केसाथ दुष्कर्म कर हत्या कर दी। बच्ची का शव कांशीराम कॉलोनी में अर्ध निर्मित घर में पाया गया था। मामले में सुनवाई कर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने याची को भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 376 एबी, 302 और पॉक्सो एक्ट की धारा छह के तहत फांसी की सजा सुनाई थी। याची ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नजररूल इस्लाम जाफरी, नसिरा आदिल आदि ने बहस की।