वैरागियों के तीन और संन्यासी परंपरा के दो अखाड़ों के अलग होने के बाद अब अखाड़ा परिषद की सोमवार को होने वाली चुनावी बैठक में उदासीन परंपरा के ही अखाड़ों पर दारोमदार टिका है। कहा जा रहा है कि उदासीन परंपरा के दो अखाड़े अगर साथ नहीं आए तो फिर बहुमत के आंकड़े को पलटना मुश्किल हो जाएगा। 13 में से सात अखाड़े टूट कर अलग अखाड़ा परिषद का हरिद्वार में गठन करने के साथ ही नए अध्यक्ष का चुनाव भी कर चुके हैं। लेकिन, अब फिर सात अखाड़ों को साथ लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया गया है। देर शाम अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि भी प्रयागराज पहुंच गए।
हरिद्वार में असंतुष्टों की ओर से गठित अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष संन्यासी परंपरा के महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरीको बनाया गया है, लेकिन अब उसी महानिर्वाणी को ही तोड़ने की जुगत की जा रही है। पता चला है कि महानिर्वाणी अखाड़े के कुछ असंतुष्ट पदाधिकारी अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि और निरंजनी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी के संपर्क में बने हुए हैं। महानिर्वाणी के नाराज संतों से फोन पर वार्ता भी हुई है और उनको 25 की बैठक में आने का न्यौता भी दिया गया है।