मामला गाजीपुर जिले के थाना जमनिया का है। वर्ष 1981 में शहाबुद्दीन और हत्यारोपियों के बीच रुपयों को लेकर विवाद हुआ था। इसी झगड़े में शहाबुद्दीन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। शहाबुद्दीन के पिता हाकिमुद्दीन ने हत्या का आरोप लगाते हुए खलील समेत चार लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 43 साल पहले हुई हत्या में आजीवन कारावास की सजा पाए 71 वर्षीय बुजुर्ग को बेगुनाह करार दिया है। जबकि तीन सह अभियुक्तों की अपील के दौरान मौत हो चुकी है। यह फैसला न्यायमूर्ति सिद्धार्थ व न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की पीठ ने खलील व अन्य की ओर से सजा को चुनौती देने वाली अपील स्वीकार करते हुए सुनाया।
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मामला गाजीपुर जिले के थाना जमनिया का है। वर्ष 1981 में शहाबुद्दीन और हत्यारोपियों के बीच रुपयों को लेकर विवाद हुआ था। इसी झगड़े में शहाबुद्दीन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। शहाबुद्दीन के पिता हाकिमुद्दीन ने हत्या का आरोप लगाते हुए खलील समेत चार लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसपर ट्रायल कोर्ट ने चारों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दोषियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अपील पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अभियोजन के गवाहों में विरोधाभास पाया था। साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभियोजन की कहानी को समर्थन नहीं कर रही थी। गोली मारने का आरोप तीन लोगों पर लगाया गया है जबकि पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के मुताबिक केवल एक चोट आई है। कोर्ट ने आरोपी मोफीद को आजीवन कारावास से बरी कर दिया है। जबकि खलील, जहीर और जैनुद्दीन की अपील के दौरान मौत हो चुकी है।