क्वार्सी क्षेत्र के विष्णुपुरी बेला मार्ग पर सात साल पुराने विवाहिता को मिट्टी का तेल डालकर जिंदा जलाने के मामले में दोषी पति-सास को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह फैसला एडीजे-16 मो. नसीम की अदालत से सुनाया गया है। आरोप है कि दहेज में पांच लाख रुपये न देने पर आरोपियों ने विवाहिता को मार डाला था। इस मुकदमे में आरोपी विवाहित ननद को साक्ष्यों के अभाव में बरी किया गया है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी गोपाल सिंह राणा के अनुसार, 29 अक्तूबर 2016 को बदायूं के कस्बा बिल्सी निवासी उमेश चंद्र ने मुकदमा दर्ज कराया था कि उन्होंने अपनी बेटी श्रेया वार्ष्णेय की शादी 6 मार्च 2013 को विष्णुपुरी बेला मार्ग के अंकुर गुप्ता संग की थी। शादी में दस लाख रुपये दहेज दिया गया। इसके कुछ समय बाद ही श्रेया को अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर तंग किया जाने लगा। बाद में उसे ससुराल में छोड़ दिया गया। 26/27 अक्तूबर 2016 की रात श्रेया का फोन अपने पिता के पास पहुंचा कि उससे ससुराली फैक्टरी लगाने के लिए पांच लाख रुपये मांग रहे हैं। न देने पर धमकी दे रहे हैं। 29 अक्तूबर को अलीगढ़ में ही रहने वाले उमेश के साले गिरीश ने उन्हें सूचना दी कि श्रेया को गला दबाकर व जलाकर मार दिया गया है। इस खबर पर अलीगढ़ आकर अंकुर, उसकी मां विमलेश व विवाहित बहन स्वाती उर्फ सोना को नामजद कर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया है। इधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला की मौत 95 फीसद जलने व दम घुटने से माना गया।
मुकदमे की विवेचना तत्कालीन सीओ तृतीय द्वारा की गई और गिरफ्तारी की प्रक्रिया के साथ चार्जशीट दायर की गई। मामले में सत्र परीक्षण के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं व अभियोजन अधिवक्ता की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों व दलील के आधार पर अदालत ने पति व सास को दोषी करार दिया। ननद को बरी किया गया है। न्यायालय ने दोनों दोषियों को उम्रकैद व 15-15 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। साथ में आधी जुर्माना राशि पीड़ित पक्ष को देने के निर्देश दिए हैं।