-2 वेंटिलेटर बेड पर एक नर्सिंग स्टाफ जरूरी
-10 वेंटिलेटर बेड पर एक निश्चेतक है जरूरी
-बाकी सहयोगी डॉक्टर व अन्य संसाधन जरूरी
ये है स्थिति
-10 वेंटिलेटर बेड सिर्फ 3 नर्सिंग स्टाफ के सहारे
-1 निश्चेतक डॉक्टर की यहां पर है शिफ्ट में तैनाती
समस्याएं ये भी
आईसीयू संचालन के दौरान हर तरह की गंभीर बीमारी-इमरजेंसी से ग्रसित मरीज अस्पताल पहुंचता है। मगर दीनदयाल संयुक्त अस्पताल में सिर्फ सीओपीडी, सामान्य हेड इंजरी, फेफड़े के ही डॉक्टर हैं, जो इमरजेंसी, ओपीडी या आईसीयू में उपचार दे सकते हैं। यहां हृदय, दिमाग, नेफ्रो, बेड डायलीसिस, गंभीर सर्जरी से संबंधित कोई डॉक्टर नहीं है। इसलिए यहां मरीज आने पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है।
24 में केवल 16 डॉक्टर तैनात
अस्पताल में तैनात कुल 16 डॉक्टरों में से एक सीएमएस, एक फिजिशियन, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक रेडियोलॉजिस्ट, दो पैथॉलाजिस्ट, दो जनरल सर्जन, दो आर्थोपेडिक सर्जन, एक नेत्र सर्जन, तीन ईएमओ, एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक सोनेलॉजिस्ट हैं। जबकि इन सभी विभागों में जरूरत कुल 24 डॉक्टरों की है।
पीकू वार्ड भी नहीं हो पा रहा संचालित
सौ बेड के इतने बड़े अस्पताल की हालत ये है कि यहां एक पीकूवार्ड व उसके साथ एनआईसीयू का संचालन भी होना है। जिसके लिए कमरा आरक्षित है। मगर स्टाफ की कमी की वजह से अभी तक यहां का एनआईसीयू संचालित नहीं हो रहा। यहां आने वाले बच्चे महिला अस्पताल भेजे जाते हैं।