यूक्रेन-रूस में युद्ध छिड़ा है। दोनों तरफ से जानमाल का नुकसान हो रहा है। इन सबके बीच भारतीय विद्यार्थियों का नुकसान भी उनसे कम नहीं है। उन्हें डर सता रहा है कि डॉक्टरी की डिग्री मिल पाएगी या नहीं। इसकी तस्वीर युद्ध समाप्ति के बाद ही साफ हो सकेगी। फिलहाल, डॉक्टरी की डिग्री को लेकर यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी सशंकित हैं।
यूक्रेन से स्वदेश लौटने के लिए भारतीय विद्यार्थी व उनके अभिभावक परेशान हैं। साथ ही उनको अपने करियर व डॉक्टरी की डिग्री को लेकर भी चिंतित हैं। कई विद्यार्थियों का अंतिम वर्ष था। बाकी विद्यार्थियों का पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवां साल चल रहा है। डिग्री को लेकर यह विद्यार्थी कितने फिक्रमंद होंगे, इसका अंदाजा इसी बात लगाया जा सकता है कि वह वहां पर बिगड़े हालात के बीच ऑनलाइन कक्षाएं करते रहें। छात्र अमान ने बताया कि जब यूक्रेन-रूस के बीच तनाव था, तब भारत जाने की बात कही थी तो यूनिवर्सिटी की तरफ से कहा गया था कि अनुपस्थिति दिखाकर उसका नाम काट दिया जाएगा। ऐसे में पढ़ाई कब शुरू होगी, डिग्री मिलेगी या नहीं। यही सवाल यूक्रेन में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के जेहन में कौंध रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ के शिविर में ठहरे हैं बच्चे : ताज उद्दीन
यूक्रेन में फंसे छात्र अमान उद्दीन के पिता ताज उद्दीन ने बताया कि उनके बेटे से बातचीत हुई तो उसने कहा, वह उडेसा पहुंच गया था। इसके बाद वह बस के जरिये मालडोवा पहुंचे, जहां संयुक्त राष्ट्र संघ के शिविर में ठहरे हैं, वीजा बुधवार तक का है। उनके साथ उत्तर प्रदेश के 40-50 बच्चे हैं। मालडोवा की सीमा से रोमानिया की सीमा सटी है। उन्हेें संघ भेजेगा। रोमानिया से स्वदेश आएंगे। रोमानिया सीमा पर जो बच्चे हैं, वह काफी परेशान हैं। फ्लाइट का कोई अता-पता नहीं है।
पैदल पहुंची रोमानिया सीमा पर बेटी : सुशीला
यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहीं उर्वशी की मां सुशीला सिंह राजपूत ने कहा कि बेटी ने बताया कि वह पैदल रोमानिया सीमा पर पहुंचीं। रविवार दोपहर एक बजे बेटी का मोबाइल पर मैसेज आया कि वह रोमानिया सीमा पर बने शिविर में है। बेटियों को प्राथमिकता के आधार पर रोमानिया में प्रवेश कराया जा रहा है। बेटी की वापसी का कोई अता-पता नहीं है, क्योंकि फ्लाइट नहीं है। सुशीला ने कहा कि वह लगातार अपनी बेटी का हौसला बढ़ा रही हैं।
पुलिस-प्रशासन परिवारों के संपर्क में, बच्चों की वापसी का इंतजार
पुलिस प्रशासन की टीमें बच्चों के परिवारों के संपर्क में हैं। बच्चों की वापसी का इंतजार किया जा रहा है। केंद्र सरकार से लेकर प्रदेश सरकार के स्तर से जारी वे सभी नंबर इन परिवारों व बच्चों को मुहैया कराए जा रहे हैं, जो अधिकारी भारतीय छात्रों की वापसी के लिए वहां प्रयासरत हैं। प्रयास किए जा रहे हैं कि किसी तरह जल्द से जल्द बच्चे वापस आ जाएं। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने अपने जिले के बच्चों की सूची परिचित अधिकारियों को भेजी है। उनका कहना है कि वे लगातार उन अधिकारियों के संपर्क में हैं। प्रयास किए जा रहे हैं कि किसी भी तरह बच्चे जल्द से जल्द वापस आ जाएं।
यूक्रेन में फंसे अलीगढ़ के विद्यार्थी
- सुमित यादव पुत्र मोरमुकुट, वसुंधरा इन्क्लेव, स्वर्ण जयंती नगर
- माधवी अरोरा पुत्री पुनीत अरोरा, ग्रीन पार्क अपार्टमेंट
- गौरव कुमार पुत्र सुरजीत कुमार
- अमान उद्दीन पुत्र ताज उद्दीन, अजीज विला, सर सैयद नगर
- रितिक वार्ष्णेय पुत्र डॉ. विश्व मित्र आर्य, सारसौल, देहली गेट
- गौरव माहेश्वरी पुत्र महेश बाबू माहेश्वरी, एडीए कॉलोनी रामघाट रोड
- उर्वशी राजपूत पुत्री भानु प्रताप सिंह, राम बाग कॉलोनी
- फाल्गुनी धीरज पुत्री पंकज धीरज, लेखराज नगर, सेंटर प्वाइंट
- आकाश रावत पुत्र डॉ. राजकुमार रावत, शिव शक्ति, इन्क्लेव कॉलोनी, खेरेश्वर मंदिर
- मिशिका वार्ष्णेय पुत्री प्रदीप वार्ष्णेय, साकेत विहार कॉलोनी आगरा रोड
- अरमान अहमद पुत्र इंजी. नसीर अहमद, नबी नगर, हमदर्द नगर, जमालपुर
- नेअम रशीद पुत्री सैयद रशीद आलम, ग्रीन अपार्टमेंट, मंजूर गढ़ी
- विशाल प्रताप पुत्र मनोज कुमार, क्वार्सी बाईपास, देवी का नगला
- शुभम सिंह पुत्र धर्मवीर सिंह, रामबाग कॉलोनी रामघाट रोड
- हितेश यादव पुत्र ओंकार यादव, वैष्णो रॉयल सिटी, सिधौली
- सार्थक उपाध्याय पुत्र आमोद कुमार उपाध्याय, स्वर्णजयंती नगर
- मोहम्मद फरहान खान पुत्र मोहम्मद खान, जाकिर नगर, जीवनगढ़
- खुशी वार्ष्णेय पुत्री गोपाल दास, गांधीनगर, अलीगढ़
- मोहन कुमार पुत्र सत्यपाल सिंह, शिव विहार कॉलोनी
- साहिल खान पुत्री निजाम उद्दीन, सिविल लाइंस
- खुशिका सिंह पुत्री तेजवीर सिंह, स्वर्णजयंती नगर
- दीपक पाठक पुत्र सुशील कुमार पाठक, शिवपुरी, छर्रा
- रविंद्र प्रताप पुत्र ठाकुर प्रसाद, लाल डिग्गी, सिविल लाइंस
- गौसिया परवीन पुत्री अकील अहमद, हमदर्द नगर, जमालपुर
- साफिया पुत्री शकील अहमद, हमदर्द नगर, जमालपुर
रोमानिया सीमा पर शिविर में बैठी उर्वशी।- फोटो : CITY OFFICE