18 जुलाई 2002 को तत्कालीन एसओ छर्रा पुलिस टीम के साथ गश्त पर थे। इसी दौरान मुखबिर की सूचना पर गांव मौनई में एक घर में दबिश दी। वहां आरोपी तमंचा बनाते फैक्टरी संचालित करते पकड़ा गया। 22 साल बाद कोर्ट का फैसला आया।
अलीगढ़ में छर्रा के गांव मौनई में 22 वर्ष पहले तमंचा फैक्टरी चलाते पकड़े गए जमील को अदालत ने दोषी करार देकर सजा सुनाई है। उसे तीन वर्ष कैद व पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। पुराने मुकदमों के निस्तारण संबंधी अभियान के क्रम में जेएम प्रथम रजत सिंह यादव की अदालत से यह फैसला सुनाया गया है।
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एपीओ रविकांत कैसला के अनुसार ये वाकया 18 जुलाई 2002 का है। तत्कालीन एसओ छर्रा वेदपाल सिंह पुलिस टीम के साथ गश्त पर थे। इसी दौरान मुखबिर की सूचना पर गांव मौनई में जमील खां के घर दबिश दी। जहां जमील तमंचा बनाते फैक्टरी संचालित करते पकड़ा गया। मौके से 12 बने तमंचा, काफी संख्या में अधबने तमंचा व उपकरण आदि बरामद हुए। मामले में मुकदमे के आधार पर जेल भेजा गया। न्यायालय ने अब आकर उसे सजा सुनाई है।