शहर में बेतरतीब तरीके से बढ़ रहे ई-रिक्शा जाम का कारण बन रहे हैं। इन पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से नियम और जोन निर्धारण का प्लान तैयार किया है। साथ ही ई-रिक्शा चालकों को आई कार्ड मिलेगा। हर जोन के रूट तय होंगे और उन रूट के हिसाब से रंग भी निर्धारित किया जाएगा।
स्मार्ट सिटी की पग पर चल रहे शहर में जाम की समस्या से जनता जूझ रही है। इस समस्या के पीछे ई-रिक्शाओं को जिम्मेदार ठहराया गया है। वर्तमान में जिले में पांच हजार के करीब ई-रिक्शा संचालित हैं, जबकि परिवहन विभाग की ओर से मात्र 2200 के करीब ई-रिक्शा ही पंजीकृत हैं। अब सभी ई-रिक्शाओं का पंजीकरण करने, चालकों का आई-कार्ड जारी करने का आदेश डीएम ने पिछले दिनों दिया है। इसके अलावा शहर में ई-रिक्शा संचालन के लिए जोन निर्धारित करने, जोन के हिसाब से रंग निर्धारित करने का आदेश नगर निगम को दिया गया है। इसमें यह भी ध्यान रखने को कहा कि जो ई-रिक्शा चालक जिस जोन का निवासी हो, उसे उसके होम जोन में ही ई-रिक्शा चलाने की अनुमति प्रदान की जाए। साथ ही पुराने और जर्जर ई-रिक्शाओं को शहर की सड़कों से हटाने का भी आदेश जारी किया है। इसके साथ ही शहर में जो भी नाबालिग ई-रिक्शा दौड़ा रहे हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग को जारी किए हैं।
लाइसेंस होता है जारी, परिवहन विभाग से मिलती है आरसी
एआरटीओ प्रवर्तन अमिताभ चतुर्वेदी ने बताया कि ई-रिक्शा चालकों को भी परिवहन विभाग की ओर से अलग से संचालन का लाइसेंस मिलता है। यह लाइसेंस 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले लोगों को मिलता है। इसके साथ ही विभाग में यह भी प्रावधान है कि जब भी कोई नया ई-रिक्शा सड़क पर संचालन के लिए आएगा तो उसका टैक्स कटवाते हुए विभाग में पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद उक्त ई-रिक्शा के नाम पर आरसी जारी होगी, जिसके आधार पर उसे वैध माना जाएगा। वर्तमान में शहर में सिर्फ 2200 के करीब ई-रिक्शा वर्तमान में वैध हैं। जबकि अवैध तौर पर 3000 से अधिक ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि थानों में स्थान अभाव के चलते ई-रिक्शा सीज करने में परेशानी आती है, इसके चलते अभियान ठीक से नहीं चल पाता है।