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अलीगढ़ः रीबॉक का फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा, 11 गिरफ्तार

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सासनी गेट क्षेत्र के महेंद्र नगर में रीबॉक कंपनी का अंतरराज्यीय फर्जी कॉल सेंटर संचालित हो रहा था। इसके जरिये ऑनलाइन ऑर्डर बुकिंग के नाम पर दक्षिण भारत के लोगों से ठगी की जा रही थी। इलाका पुलिस ने ऑपरेशन-420 के तहत इस फर्जी कॉल सेंटर को पकड़कर चार संचालकों सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया है, इनमें सात युवतियां हैं। सभी 11 लोगों को जेल भेज दिया गया है। इस कॉल सेंटर से पुलिस को मोबाइल, लैपटॉप, पार्सल, आर्डर सीट आदि सामान बरामद हुआ है।
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पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, पिछले कुछ समय से यह सूचनाएं मिल रही थीं कि महेंद्र नगर के एक मकान में किराये पर ऑनलाइन सामान बेचने के बहाने लोगों के साथ धोखाधड़ी का कॉल सेंटर चल रहा है। रविवार सुबह इंस्पेक्टर गोविंद बल्लभ शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापा मारा। इस दौरान पुलिस को देखते ही वहां भगदड़ मच गई और चार युवक व सात युवतियों को पकड़ लिया गया। पकड़े गए लोगों ने अपने नाम कॉल सेंटर संचालक क्रमश: हाथरस के नाई नगला निवासी अरमान उर्फ आमिर, शहनवाज व अंसार बताए। अन्य के नाम बन्नादेवी आईटीआई रोड निवासी सुमित पचौरी, गांधीपार्क के सिंधौली निवासी सोनिया सिंह, नौरंगाबाद छावनी निवासी गरिमा, नौरंगाबाद की निशा कुमारी, सिविल लाइंस के सेंटर प्वाइंट निवासी यशिका यादव, सासनीगेट के पला साहिबाबाद निवासी अस्मिता शर्मा, कृष्णा विहार निवासी निधि शर्मा, महेंद्रनगर निवासी हेमलता बताए गए हैं। ये आठ लोग यहां बतौर कर्मचारी काम कर रहे थे। मकान में चल रहे कॉल सेंटर से पुलिस ने आठ पार्सल, 42 आर्डर सीट, 17 मोबाइल फोन, चार आधार कार्ड, दो बैंक चेक बुक, एक लैपटॉप, सात रजिस्टर ग्राहक नंबर सूची, सात स्पीच लेटर के अलावा 11 हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं।
यूपी में बैठकर दक्षिण भारत के ग्राहकों से ठगी
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकारा कि वे रीबॉक कंपनी का फर्जी काल सेंटर चला रहे हैं। यहां वे दक्षिण भारत के राज्यों में रहने वाले लोगों के नंबर गूगल से लेकर उन्हें कॉल करते थे और आकर्षक ऑफर के नाम पर मात्र 6500 रुपये में कंपनी के जूते, टी-शर्ट, वायॅलेट, घड़ी खरीदने पर रेडमी का मोबाइल फ्री होने का ऑफर देते थे। कैश ऑन डिलीवरी के जरिये ग्राहक से अपने वॉलेट एकाउंट में रुपये डलवाए जाते थे और उसके पते पर डिलीवरी भेजी जाती थी, जिसमें सामान के नाम पर गत्ते, ईंट आदि सामान रखकर भेजा जाता था। चूंकि सुदूर राज्य में बैठा ग्राहक ठगी का शिकार होता था। इसलिए वहां की पुलिस भी उस ठगी पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं देती थी।
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फर्जी आधार कार्ड की मदद से खरीदते सिमकार्ड
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकारा कि कॉल सेंटर के संचालक खुद फर्जी आधार कार्ड तैयार करने का काम जानते थे। उन्हीं की मदद से वे फर्जी सिम खरीदते थे, जिनकी मदद से ग्राहकों को कॉल की जाती थी। सुमित पचौरी लड़कियों के ऊपर बतौर सुपरवाइजर और पैकिंग कराने की जिम्मेदारी संभालता था। शहनवाज, आमिर व अंसार खुद ग्राहकों को मोबाइल फोन पर बातें करके अपने जाल में फंसाते थे।
किराये के मकान में डेढ़ साल से चल रहा धंधा
महेंद्र नगर से पहले इस कॉल सेंटर के संचालक हाथरस में यह धंधा करते थे। वहां पुलिस के रडार पर आने और कई लोगों के जेल जाने के बाद जनवरी 2020 में ये लोग यहां किराये पर काम करने आ गए। मकान स्वामी को बताया कि उनका माल डिलीवरी का काम है। क्या डिलीवरी देते हैं, यह कुछ नहीं बताया था। तभी से यह धंधा चल रहा था। लॉकडाउन के दौरान धंधा कुछ समय बंद रहा और अब फिर शुरू हो गया था।
यूपी छोड़ बाकी राज्यों के ग्राहक फंसाते
ये लोग यूपी के ग्राहकों को कॉल नहीं रकते थे। इसके अलावा तेलंगाना, आंध प्रदेश, केरला, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, हरियाणा, पंजाब तक के लोगों को फोन कर ऑफर देकर ठगते थे।
डाक विभाग की मिलीभगत का अंदेशा
इस काम में डाक विभाग की मिलीभगत के अंदेशे पर भी पुलिस काम कर रही है। क्योंकि लोग डाक विभाग के जरिये ही अपनी डिलीवरी भेजा करते थे। एक-एक दिन में सौ सौ डिलीवरी बुकिंग कर भेजी जा रही थीं। डाक विभाग को भनक क्यों नहीं लगी। यहां रेलवे के डाक पार्सल पर इस पैकिंग के डिब्बों का ढेर लगा रहता था। डाक वजन के हिसाब से जाती है। पुलिस इस दिशा में भी जांच कर रही है।
बैंक खाते भी जांच की जद में
एसपी सिटी कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि यह बेहद गंभीर प्रकरण है। अभी इसमें इनके रैकेट के अन्य लोग भी रडार पर हैं, जिनकी तलाश में पुलिस टीम लगी है। वहीं इनके बैंक खातों को भी सीज कराने व उनसे हुए लेनदेन का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
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