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अलीगढ़ः शहर की एक भी सड़क ठीक नहीं, नगर निगम के अफसर कमरों में बैठे रहते हैं : डीएम

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शहर की बदहाल और जर्जर सड़कों पर आखिरकार जिलाधिकारी का गुस्सा फूट ही पड़ा। बुधवार को सड़क सुरक्षा की बैठक में उन्होंने नगर निगम अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। वर्चुअल बैठक में भी सक्षम अधिकारी के मौजूद नहीं रहने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जाहिर की।
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जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे ने सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की वर्चुअल बैठक में कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़े विभागों को मानव जीवन को ध्यान में रखते हुए सदैव गंभीर एवं संवेदनशील रहना चाहिए। उन्होंने नगर निगम को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि वर्तमान में शहर के अंदर सड़कों की हालत अत्यंत दयनीय है। ऐसी कोई सड़क नहीं है जो पूर्णत: गड्ढामुक्त हो। जब सरकार जनहित में धन आवंटन कर रही है तो समुचित सदुपयोग क्यों नहीं हो रहा है। उन्होंने नगर निगम की लचर कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि निगम अधिकारी तो ऑफिस में बैठकर कार्य करते हैं। झेलना तो जनता और पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को पड़ता है। नगर निगम में चार अवर अभियंता तैनात हैं। कार्य विभाजन के अनुसार क्षेत्र बंटे हैं। फिर भी ऐसी कोई सड़क नहीं है, जिस पर गड्ढे न हों। सड़क, ट्रैफिक लाइट, साइन बोर्ड, निराश्रित जानवरों को सड़क से हटाना कोई बड़ा कार्य नहीं है। धन की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता सिर्फ पूर्ण मनोयोग से कार्य करने की है।
जनपद में चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर लोगों की जान बचाने के लिए डीएम ने संबंधित विभागों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश देते हुए कहा कि अधिकारी संवेदनशीलता के साथ कार्य करें। आकस्मिक दुर्घटना में एक व्यक्ति की जान जाने से पूरा परिवार ही प्रभावित होता है। एनएचएआई द्वारा बताया गया कि चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर सड़क सुरक्षा सलाहकार से सुझाव प्राप्त कर कार्य कराया जा रहा है। नगरीय क्षेत्र में जलभराव एवं सड़कों की भौतिक स्थिति के संबंध में नगर मजिस्ट्रेट सहित एसीएम प्रथम एवं द्वितीय द्वारा प्रस्तुत की गई निरीक्षण आख्या पर नगर निगम से सक्षम अधिकारी की अनुपस्थिति पर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नाराजगी व्यक्त की गई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में शहर की सड़कों की बड़ी दुर्दशा है। महसूस होता है कि जन समस्याओं के प्रति नगर निगम पूर्णत: संवेदनहीन हो गया है। डीएम ने नगर निगम से ठीक की गई सड़कों के लिए शपथ पत्र देने के निर्देश दिए।
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रामघाट रोड की तरफ से मीनाक्षी पुल के ऊपर बनाए गए डिवाइडर के प्रति आए दिन जन सामान्य की प्रतिक्रियाओं का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने सवाल किया कि पुल पर डिवाइडर बनाया जाना क्या उचित है। नव विकसित कॉलोनियों एवं अन्य मार्गों पर प्रकाश व्यवस्था के संबंध में नगर मजिस्ट्रेट एवं अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वारा दी गयी निरीक्षण आख्या के 50 बिंदुओं पर नगर निगम द्वारा बताया गया कि दो कार्य शेष रह गए हैं, जो प्रगति पर हैं। जिलाधिकारी ने नगर मजिस्ट्रेट को कराए जा रहे कार्य की क्रास चेकिंग करने के निर्देश दिए।
दीपावली बाद मुख्य मार्गों से हटाया जाएगा अतिक्रमण
जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए बैठक में निर्णय लिया गया कि दीपावली के उपरांत मुख्य मार्गों से अतिक्रमण हटाया जाएगा। नगर के आठ एंट्री प्वाइंट पर ट्रैफिक बूथ की स्थापना होगी। एसपी ट्रैफिक द्वारा बताया गया कि जल्द ही चेकपोस्ट के स्थान पर ट्रैफिक बूथ बनाया जाएगा। शहर के प्रमुख चौराहों पर रिक्शा, ई-रिक्शा, ठेला गाड़ी, ऑटो को खड़ा किए जाने से उत्पन्न जाम की स्थिति से निजात दिलाने के लिए चौराहों से 50 मीटर की दूरी तक नोपार्किंग जोन में रखने का सुझाव दिया गया। बैठक में एडीएम सिटी राकेश कुमार पटेल, नगर मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार वर्मा, एसडीएम गभाना प्रवीण कुमार, अधिशासी अभियंता लोनिवि अनिल कुमार शर्मा, संजीव कुमार पुष्कर, एसपी ट्रैफि क सतीश कुमार और एनएचएआई के अधिकारी उपस्थित रहे।
ई रिक्शा परमिट जारी करने का नगर निगम को अधिकार नहीं : एआरटीओ
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी अमिताभ चतुर्वेदी ने बताया कि जनपद में केंद्रवार 3197 ऑटो रिक्शा परमिट जारी किए गए हैं। अलीगढ़ नगरीय केंद्र से 16 किलोमीटर के भीतर 801 सीएनजी चलित ऑटो रिक्शा के परमिट जारी किए गए हैं। जट्टारी केंद्र के लिए 615, इगलास केंद्र के लिए 121, अतरौली केंद्र के लिए 1230 एवं गभाना केंद्र के लिए 430 ऑटो रिक्शा परमिट जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि नगर निगम को किसी भी ई.रिक्शा को परमिट जारी न करने का अधिकार नहीं है। परंतु संज्ञान में आया है कि निगम द्वारा परमिट जारी किये जा रहे हैं, जोकि अत्यंत ही खेदजनक है। उन्होंने बताया कि ई.रिक्शा का मार्ग एवं रंग का भी निर्धारण किया गया है। एआरटीओ ने बताया कि नगर निगम द्वारा संचालित की जाने वाली 25 इलेक्ट्रिक बसों के लिए मार्ग का निर्धारण कर लिया गया है। एलमपुर पर चार्जिंग प्वाइंट स्थापना का कार्य भी प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि परिवहन आयुक्त द्वारा सार्वजनिक सेवा यानों से हुई दुर्घटना में घायल एवं मृत व्यक्तियों केे आश्रितों को दी जाने वाली सहायता के 69 मामलों में सिर्फ 39 मामलों में एसडीएम स्तर से आख्या प्राप्त हुई है। शेष मामलों में शीघ्र आख्या भेजने की आवश्यकता है। स्कूल वाहन चालकों के चरित्र प्रमाण पत्र एवं ड्राइविंग लाइसेंस के सत्यापन का भी बैठक में निर्णय लिया गया।
चौराहों की लाइटों की टाइमिंग पर सवाल
इंडियन एलायंस ऑफ एनजीओ फॉर रोड सेफ्टी के एडवाइजर अरुण श्रीवास्तव ने जिलाधिकारी का ध्यान आकर्षित किया कि शहर के अंदर गति की अधिकतम सीमा के संबंध में बैठकों के माध्यम से साइन बोर्ड स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की गयी थी, परंतु उक्त कार्य नहीं हुआ है। स्पीड ब्रेकर भी नहीं लगे हैं और न ही निराश्रित जानवरों के सड़कों पर घूमने पर ही लगाम लग पा रही है। उन्होंने किशनपुर तिराहे एवं कठपुले पर रेड लाइट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित न होने के साथ ही चौराहों पर स्थापित रेड लाइट पर ठहरने एवं निकलने के समय की गणना पर भी प्रश्न चिन्ह लगाया।

ओजोन सिटी मार्ग स्थित होम गार्ड कार्यालय के सामने रोड में गड्ढे।- फोटो : CITY OFFICE

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