साइबर मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने कुल 13 गवाह तलब कराए। जिनमें अस्सी वर्षीय चेन्नई की इनग्रिट ग्रांट, बैंक के मुंबई मुख्यालय से आशुतोष कुमार मित्तल, मोबाइल कंपनी लखनऊ मुख्यालय से कौशलेंद्र त्रिपाठी आदि के बयान कराए गए। साथ में पैरवी करने वाले विवेचक इंस्पेक्टर साइबर थाना सुरेंद्र कुमार, एसआइ समरपाल सिंह, एसआइ कुसुमलता, मुख्य आरक्षी अतुल कुमार गुप्ता, राजेश राणा, मनीषा यादव आदि ने मजबूत पैरवी की। तब जाकर सजा हुई है।
ये था ठगी का तरीका
वैवाहिक विज्ञापन की साइट पर सइमन फर्जी तस्वीर लगाकर खुद का एकाउंट बनाता था। अपने बायो में वह खुद को रीयल एस्टेट कारोबारी बताता था। साथ में खुद को एनआरआई बताता था। इधर, पुलिस जांच में उजागर हुआ कि वह पांच वर्ष पहले व्यापार वीजा पर कपड़े के व्यापार के लिए दिल्ली आया था। यहां नुकसान होने पर अपने अन्य साथियों संग इस ठगी के धंधे में लग गया।
अलीगढ़ जिले में साइबर अपराध के मामले में यह पहली सजा हुई है। इसके लिए कई माह की मेहनत व गवाहों को तलब कराकर गवाही कराया गया है। मजबूती से साक्ष्य रखे गए।-संतोष कुमार यादव, एपीओ
प्रदेश में नवसृजित 18 साइबर थानों में शायद यह पहली सजा हुई है। अभी तक जानकारी मेें नहीं आया कि कहीं अन्य सजा हुई हो।-सुरेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर साइबर थाना