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Exclusive: जेवर एयरपोर्ट के आस-पास जमीनें महंगी, ठगने के लिए तैयार हैं जालसाज, जमीन खरीदते समय रखें यह ध्यान

Sat, 26 Aug 2023 03:28 AM IST
चमन शर्मा रिंकू शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

यमुना एक्सप्रेस वे और अलीगढ़ पलवल हाईवे से सटती जमीनें सोना उगल रही हैं। इसलिए अलीगढ़, दिल्ली और नोएडा से जुड़े कुछ भू माफिया लोगों को फर्जी नक्शा दिखाकर लाखों रुपये का चूना लगा रहे हैं।
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यमुना एक्सप्रेस वे - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ के टप्पल से 23 किमी, लगभग 40 मिनट की दूरी पर जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन रहा है। जिससे यमुना एक्सप्रेस वे और अलीगढ़ पलवल हाईवे से सटती टप्पल और खैर की जमीनों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। आलम यह है कि बीते साल के मुकाबले जमीनों की कीमत लगभग 30 से 40 फीसदी तक बढ़ चुकी है।

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यमुना एक्सप्रेस वे और अलीगढ़ पलवल हाईवे से सटती जमीनें सोना उगल रही हैं। इसलिए अलीगढ़, दिल्ली और नोएडा से जुड़े कुछ भू माफिया लोगों को फर्जी नक्शा दिखाकर लाखों रुपये का चूना लगा रहे हैं। फर्जी कॉलोनियों में जमीन का बैनामा करा कर दाखिल खारिज कराने तहसील आ रहे खरीदारों के सामने सच्चाई आई तो उनके होश उड़ गए। अब पीड़ित खरीदार जमीन दिलाने वालों को तलाश रहे हैं तो खुद को बिल्डर बताने वाले लोग मुंह फेर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी प्रकरण से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।

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अलीगढ़-पलवल हाईवे पर तेजी से बढ़ती जमीनों की कीमत
जेवर एयरपोर्ट का इलाका टप्पल से सटा हुआ है। इसके आसपास होटल, रेस्टोरेंट, आईटी कंपनियां, ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं बढ़ रही हैं। अलीगढ़-पलवल हाईवे पर जमीन मिलना मुश्किल हो गया हैं। इसी हाईवे पर राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्व विद्यालय, ट्रांसपोर्ट नगर, डिफेंस कॉरिडोर आदि का निर्माण कार्य जारी है। एडीए की ओर से ग्रेटर अलीगढ़ आवासीय योजना शुरू हो रही है। जिससे दिल्ली-एनसीआर के लोग यहां जमीन खरीद रहे हैं। सड़क किनारे की जमीनें सर्किल रेट के दोगुने-तिगुने दामों तक में बिक रही है। बीते दो साल में जमीन लगभग 40 फीसदी तक ज्यादा महंगी हो गई है। डिफेंस कॉरिडोर के आसपास की जमीनों की बिना एनओसी बिक्री पर रोक है। 

प्रशासन की सख्ती से लगा था अंकुश
टप्पल के किसान नेताओं की शिकायत पर प्रशासन ने 25 नवंबर 2022 को तत्कालीन एसडीएम अनिल कटियार के नेतृत्व में राजस्व टीम से जमीनों के फर्जीवाड़े की जांच कराई। जिसमें खुलासा हुआ कि दिल्ली और नोएडा के भू-माफिया ने ग्राम समाज की भूमि पर कब्जा कर वहां अवैध रूप से कॉलोनी बनाते हुए महंगे दामों में प्लॉट बेच डाले। इसमें खैर से जुड़े दलालों की भी भूमिका थी। इसमें कई बिल्डरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। टप्पल के ही लालपुर एवं आसपास के गांवों की करीब 560 बीघा भूमि पर भी कुछ भू- माफिया ने अवैध कब्जा कर लिया था। जिसे अब राजस्व अभिलेखों में ग्राम पंचायत की जगह के रूप में दर्ज किया गया है। 

सावधान 

-आप यदि जमीन का सौदा कर रहे हैं तो सावधानी बरतिए। सिर्फ विश्वास में ही नहीं, बल्कि भूखंड से संबंधित कार्यालयों से पूरी पड़ताल करने के बाद ही सौदा करें। पिछले छह महीनों में खैर तहसील क्षेत्र में ऐसे अनगिनत मामले सामने आ चुके हैं। जिनमें पीडि़तों की ओर से जमीन की धोखाधड़ी को लेकर टप्पल और खैर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इनमें भूमाफिया द्वारा जमीन मालिक को जान से मारने की धमकी देना, फर्जी रजिस्ट्री करना, एक ही जमीन कई लोगों को बेचने के मामले शामिल हैं।
-ऑनलाइन प्लेटफार्म पर भी तमाम रीयल एस्टेट कंपनी प्लेटफार्म की पोस्ट वायरल हो रही हैं। जिसमें यहां तक ऑफर दिया जा रहा है कि आपको अगर जमीन खरीदनी है, साइट निरीक्षण करना है तो कार लेने आएगी और छोड़ने जाएगी। चाय नाश्ता तक कराया जाएगा। इसके लालच में फंसकर लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। ऐसे किसी प्लेटफार्म पर सर्च करें तो पहले उसकी सच्चाई की जांच कर लें।
-ज्यादातर मामलों में पाया गया है कि खरीदार सस्ती जमीन मिलने के लालच में पूरी पड़ताल नहीं करते हैं। ऐसे मामले भी हैं, जिनमें विक्रयकर्ता ने एग्रीमेंट के नाम से पूरी राशि लेने के बाद रजिस्ट्री करने से ही इंकार कर दिया। तब खरीदार को ठगी का पता चला ।
-एक ही जमीन दो लोगों को बेच दी जाती है। जमीन के बदले पूरी धनराशि लेने के बाद रजिस्ट्री से इंकार। फर्जी दस्तावेज से चारागाह, आरक्षित भूमि पर भी प्लाटिंग कर दी जाती है।

बरतें यह सावधानी
-तहसील, रजिस्ट्री ऑफिस, नगर पंचायत के सरकारी अभिलेखों में जमीन की पड़ताल करें। 
-रजिस्ट्री में राजस्व अभिलेखों में खसरा नंबर एवं भूमि की किस्म भी दर्ज हो।
-जमीन ग्रीन-बेल्ट, नाले, नदी तालाब या जल बहाव क्षेत्र में न हो।
-रजिस्ट्री में लिखा जाए कि राजस्व रिकॉर्ड में से कम करने पर भूखंड के मूल खसरा का क्षेत्रफल कितना बचता है।
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विवादित जमीन से परेशानियां

कोर्ट में मामला जाने के बाद जमीन विवादित हो जाती है। जमीन पर स्टे के कारण निर्माण कार्य नहीं हो सकता। न बैंक से लोन मिल सकता है न ही बेच सकते हैं। जमीन से बेदखली एवं पुलिस की कार्रवाई भी संभव। कृषि भूमि पर प्लाटिंग कराने पर सडक़, बिजली, पानी आदि सुविधाओं की कोई विधिक गारंटी नहीं होती। भू-रूपांतरण और नियमन नहीं होने से पट्टों और रजिस्ट्री में भी परेशानी होती है। मास्टर प्लान अनुमोदित नहीं होने से कई बार नक्शा बदल कर धोखा दिया जा सकता है। ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 55 में उल्लेख है कि यह खरीदार की जिम्मेदारी है कि वह संपत्ति खरीदने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल कर ले। 

केस-एक
दिल्ली के विवेक विहार के रहने वाले मुकेश गांधी ने एयरपोर्ट के आसपास जमीन 35 लाख रुपये में जमीन खरीदी। बैनामा कराने के बाद जब नींव लगाने की तैयारी की तो काश्तकार ने आकर रोक दिया। अब सच्चाई जानने के बाद मुकेश गांधी परेशान है।
केस -दो
गुरुग्राम निवासी राजेश कुमार ने सड़क किनारे सस्ती जमीन लेने के लिए टप्पल के एक प्रोपर्टी डीलर से संपर्क किया। कई जमीनें देखने के बाद उन्होंने एक जमीन पसंद कर बैनामा करा लिया। बाद में पता चला कि जमीन ग्राम समाज की है। अब वे थाने से लेकर तहसील तक अफसरों के चक्कर काट रहे हैं।
केस-तीन
नोएडा के परी चौक निवासी दिनेश भाटी ने रेस्टोरेंट खोलने के लिए टप्पल में एक जमीन तलाशी। 38 लाख खर्च कर जमीन का बैनामा करा लिया। तहसील से दाखिल खारिज कराने पहुंचे तो पता चला कि उनके साथ धोखाधड़ी हो गई है। जिस जमीन का बैनामा उन्हें किया गया है उसका पहले ही बैनामा हो चुका है। अब दिनेश थाने, तहसील में चक्कर काट रहे हैं।

प्रशासन कहिन
टप्पल में यदि प्रशासन की जानकारी के बिना कहीं भी सरकारी जमीनों को फर्जी नक्शे के आधार पर विकसित कर अवैध कॉलोनियां बनायी जा रही हैं, या बिल्डरों द्वारा फर्जीवाड़ा किया जा रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - मीनू राणा, एडीएम वित्त एवं राजस्व।
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