-आप यदि जमीन का सौदा कर रहे हैं तो सावधानी बरतिए। सिर्फ विश्वास में ही नहीं, बल्कि भूखंड से संबंधित कार्यालयों से पूरी पड़ताल करने के बाद ही सौदा करें। पिछले छह महीनों में खैर तहसील क्षेत्र में ऐसे अनगिनत मामले सामने आ चुके हैं। जिनमें पीडि़तों की ओर से जमीन की धोखाधड़ी को लेकर टप्पल और खैर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इनमें भूमाफिया द्वारा जमीन मालिक को जान से मारने की धमकी देना, फर्जी रजिस्ट्री करना, एक ही जमीन कई लोगों को बेचने के मामले शामिल हैं।
-ऑनलाइन प्लेटफार्म पर भी तमाम रीयल एस्टेट कंपनी प्लेटफार्म की पोस्ट वायरल हो रही हैं। जिसमें यहां तक ऑफर दिया जा रहा है कि आपको अगर जमीन खरीदनी है, साइट निरीक्षण करना है तो कार लेने आएगी और छोड़ने जाएगी। चाय नाश्ता तक कराया जाएगा। इसके लालच में फंसकर लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। ऐसे किसी प्लेटफार्म पर सर्च करें तो पहले उसकी सच्चाई की जांच कर लें।
-ज्यादातर मामलों में पाया गया है कि खरीदार सस्ती जमीन मिलने के लालच में पूरी पड़ताल नहीं करते हैं। ऐसे मामले भी हैं, जिनमें विक्रयकर्ता ने एग्रीमेंट के नाम से पूरी राशि लेने के बाद रजिस्ट्री करने से ही इंकार कर दिया। तब खरीदार को ठगी का पता चला ।
-एक ही जमीन दो लोगों को बेच दी जाती है। जमीन के बदले पूरी धनराशि लेने के बाद रजिस्ट्री से इंकार। फर्जी दस्तावेज से चारागाह, आरक्षित भूमि पर भी प्लाटिंग कर दी जाती है।
बरतें यह सावधानी
-तहसील, रजिस्ट्री ऑफिस, नगर पंचायत के सरकारी अभिलेखों में जमीन की पड़ताल करें।
-रजिस्ट्री में राजस्व अभिलेखों में खसरा नंबर एवं भूमि की किस्म भी दर्ज हो।
-जमीन ग्रीन-बेल्ट, नाले, नदी तालाब या जल बहाव क्षेत्र में न हो।
-रजिस्ट्री में लिखा जाए कि राजस्व रिकॉर्ड में से कम करने पर भूखंड के मूल खसरा का क्षेत्रफल कितना बचता है।
कोर्ट में मामला जाने के बाद जमीन विवादित हो जाती है। जमीन पर स्टे के कारण निर्माण कार्य नहीं हो सकता। न बैंक से लोन मिल सकता है न ही बेच सकते हैं। जमीन से बेदखली एवं पुलिस की कार्रवाई भी संभव। कृषि भूमि पर प्लाटिंग कराने पर सडक़, बिजली, पानी आदि सुविधाओं की कोई विधिक गारंटी नहीं होती। भू-रूपांतरण और नियमन नहीं होने से पट्टों और रजिस्ट्री में भी परेशानी होती है। मास्टर प्लान अनुमोदित नहीं होने से कई बार नक्शा बदल कर धोखा दिया जा सकता है। ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 55 में उल्लेख है कि यह खरीदार की जिम्मेदारी है कि वह संपत्ति खरीदने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल कर ले।
केस-एक
दिल्ली के विवेक विहार के रहने वाले मुकेश गांधी ने एयरपोर्ट के आसपास जमीन 35 लाख रुपये में जमीन खरीदी। बैनामा कराने के बाद जब नींव लगाने की तैयारी की तो काश्तकार ने आकर रोक दिया। अब सच्चाई जानने के बाद मुकेश गांधी परेशान है।
केस -दो
गुरुग्राम निवासी राजेश कुमार ने सड़क किनारे सस्ती जमीन लेने के लिए टप्पल के एक प्रोपर्टी डीलर से संपर्क किया। कई जमीनें देखने के बाद उन्होंने एक जमीन पसंद कर बैनामा करा लिया। बाद में पता चला कि जमीन ग्राम समाज की है। अब वे थाने से लेकर तहसील तक अफसरों के चक्कर काट रहे हैं।
केस-तीन
नोएडा के परी चौक निवासी दिनेश भाटी ने रेस्टोरेंट खोलने के लिए टप्पल में एक जमीन तलाशी। 38 लाख खर्च कर जमीन का बैनामा करा लिया। तहसील से दाखिल खारिज कराने पहुंचे तो पता चला कि उनके साथ धोखाधड़ी हो गई है। जिस जमीन का बैनामा उन्हें किया गया है उसका पहले ही बैनामा हो चुका है। अब दिनेश थाने, तहसील में चक्कर काट रहे हैं।
प्रशासन कहिन
टप्पल में यदि प्रशासन की जानकारी के बिना कहीं भी सरकारी जमीनों को फर्जी नक्शे के आधार पर विकसित कर अवैध कॉलोनियां बनायी जा रही हैं, या बिल्डरों द्वारा फर्जीवाड़ा किया जा रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - मीनू राणा, एडीएम वित्त एवं राजस्व।