मातृभाषा प्रतिष्ठा का प्रतीक नहीं, बल्कि भावनाओं और संवेदनाओं को मूर्त रूप देने का माध्यम है। हिंदी भाषा देश को एकता के सूत्र में बांध सकती है लेकिन यह तभी संभव है, जब मातृभाषा हिंदी में परस्पर संपर्क, संप्रेषण, समन्वय, सहयोग व विचारों का आदान-प्रदान हो। यह बात अमर उजाला फाउंडेशन के अभियान ‘हिंदी हैैैैं हम’ के तहत खैर सीओ मोहम्मद मोहसिन खान ने कही।
लखनऊ के लालकुआं, चारबाग के रहने वाले 2015 बैच के पीपीएस अधिकारी मोहसिन खान ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक किया। 2008 से निजी कंपनियों में केरल, मुंबई और दिल्ली में नौकरी की। 2012 में एक कंपनी ने उन्हें कनाडा जाने का प्रस्ताव दिया लेकिन भारत में एकजुटता, परस्पर प्रेम, एक-दूसरे का ख्याल रखने की भावना ने उन्हें कनाडा जाने से रोक दिया। निजी कंपनी की नौकरी छोड़कर वह उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा तैयारी में जुट गए। भूगोल और लोक प्रशासन के अलावा मुख्य रूप से हिंदी व संस्कृत विषय को चुना। पहले प्रयास में ही वर्ष 2013 में सफलता मिली। प्रदेश में चौथी रैंक आई। हिंदी में 76 नंबर मिले।
वर्ष 2015 में आगरा में सीओ के रूप में पुलिस की नौकरी शुरू करने वाले मोहसिन खान कहते हैं कि जयशंकर प्रसाद की कहानी आंधी और इंद्रजाल ने बेहद प्रभावित किया। हिंदी साहित्य पढ़ने में बेहद रुचि है। घर में 70 से अधिक हिंदी साहित्य की पुस्तकें हैं। जब भी समय मिलता है हिंदी के लेखकों के किस्से, कहानियां पढ़ते हैं। कहा कि अपनी बात को सुगमता, सरलता से समझाने का हिंदी भाषा से बेहतर माध्यम और कोई नहीं हो सकता। स्कूलों में हिंदी माध्यम से शिक्षा के साथ बच्चों को अच्छे पुराने लेखक, कथाकारों के अलावा साहित्य की जानकारी देकर हिंदी के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने हिंदी हैं हम अभियान चलाये जाने पर अमर उजाला की सराहना की।