आईसीएसई बोर्ड से पढ़े मूलरूप से कानपुर निवासी युवा आईपीएस पुलिस अधीक्षक ग्रामीण शुभम पटेल भी आम जिंदगी में हिंदी के उतने ही प्रेमी हैं, जैसे कोई हिंदी साहित्यकार। हिंदी के गाने, कविताएं, साहित्य और गजल उनकी रुचि में शामिल हैं। वह कहते हैं कि डिजिटल युग में हिंदी और मजबूत हो रही है। देशी विदेशी कंपनियों के तमाम विज्ञापन हिंदी में इसीलिए हो रहे हैं, क्योंकि अब दुनिया को हिंदी की व्यापकता और अहमियत समझ आने लगी है।
वर्ष 2008 में आईसीएसई बोर्ड से दसवीं में 96 फीसदी अंक हासिल करने वाले शुभम पटेल ने हिंदी में 90 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। बारहवीं करने के बाद उन्होंने अर्थशास्त्र में दिल्ली से मास्टर डिग्री प्राप्त की। वर्ष 2015 में सिविल सर्विस की परीक्षा दी और पास हुए। वर्तमान में वह बतौर पुलिस अधीक्षक देहात अलीगढ़ में तैनात हैं। उनके पिता शैलेंद्र पटेल कानपुर में एक इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य थे। शिक्षक पिता और परिवार से ही उन्हें हिंदी के प्रति प्यार के संस्कार मिले।
एसपी ग्रामीण कहते हैं कि हिंदी लोकप्रिय भाषा है, जो डिजिटल युग में लगातार सशक्त हो रही है। हिंदी का भविष्य उतना ही उज्जवल है, जितना किसी दूसरी भाषा का है। हिंदी मीडियम वाले बच्चों को कभी खुद को अंग्रेजी मीडियम के मुकाबले कमजोर नहीं समझना चाहिए। हिंदी में कार्यालयों में बेहतर काम हो रहा है तो तकनीक ने भी हिंदी को विकसित किया है। हिंदी साहित्य, गीत, कविताएं, गजल और रामधारी सिंह दिनकर के साहित्य में रुचि रखने वाले शुभम कहते हैं कि वर्तमान समय में हिंदी अंग्रेजी को कड़ी टक्कर दे रही है। बस जरूरत है तकनीक के इस युग में हिंदी के डिजिटल जरिये और ज्यादा मजबूत किया जाए, ताकि जो युवा वर्ग अंग्रेजी के पीछे भाग रहा है, वह ऐसा न करे।