1857 की क्रांति के पश्चात पुलिस व्यवस्था और थानों की व्यवस्था में काफी तब्दीली की गई। पुराने सभी थानों को प्रथम श्रेणी का दर्जा दिया गया। टप्पल अपवाद रहा। इसे द्वितीय श्रेणी के थाने का दर्जा दिया गया। प्रथम श्रेणी की पुलिस चौकियों को बरकरार रखा गया था। इनमें नारायनपुर, मुरसान, अगसौली, बारला और सांकरा जोड़ी गईं। ज्यादातर छोटी चौकियों को खत्म कर दिया गया। लेकिन मडराक, भांकरी, दरयापुर, पनेठी और हतीसा की पुलिस चौकियां बरकरार रखी गईं। छह नई पुलिस चौकियां बनाई गईं। इनमें छेरत, हतीसा, मिताई गोपी, जाओ और आलम शामिल थीं। इनमें से कई को बाद में बदल दिया गया। बन्ना देवी के रूप में अलीगढ़ और हाथरस के पूर्व में सलेमपुर नए थाने खोले गए। सांकरा थाना खत्म कर दिया गया।
1906 में 16 पुलिस सर्किल में बांटा गया जिला
1906 में पुलिस व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन किए गए। इसके तहत सोमना, मुरसान, सलेमपुर, अगसौली, नारायनपुर, जवां, गंगीगी और बारला थाने खत्म कर दिए गए। दतौली के रूप में नया थाना स्थापित किया गया। बन्नादेवी थाने को भांकरी ले जाया गया। इस व्यवस्था में जिले को 16 पुलिस सर्किल में बांटा गया। कोशिश की गई कि सभी तहसीलों में पुलिस सर्किल समानुपाती हों। अलीगढ़ सर्किल में कोल, भांकरी और हरदुआगंज थाना, अतरौली में अतरौली, दादों और दतौली, खैर में खैर, टप्पल और चंडौस, इगलास में इगलास और गोंडा, हाथरस में हाथरस और सासनी, सिकंदराराऊ तहसील में सिकंदराराऊ, अकराबाद और हसायन थाने शामिल किए गए। हर सर्किल में 122 वर्ग मील का इलाका और 75 हजार से ज्यादा की आबादी शामिल थी।
जारी...
स्रोत- अलीगढ़ का गजेटियर (1878-1909)