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गिरफ्तारी के वक्त पहले गरम और पुलिस के सख्त तेवर देख नरम पड़े तेजवीर सिंह

Thu, 04 Feb 2021 02:36 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
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पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तेजवीर सिंह गुड्डू का राजनीतिक सफर के बीच अपराध और विवाद से पुराना नाता है। बेशक आपराधिक सफर को तीन दशक हो गए। मगर ढाई दशक के राजनीतिक सफर में उनसे तीन बड़े विवाद जुड़े हैं। तीनों विवाद के बाद पुलिस प्रशासन ने उन पर शिकंजा कसा है। मगर सबसे खास बात है कि सक्रिय राजनीति में आने के बाद गुड्डू को पहली बार पुलिस ने सरेराह गिरफ्तार किया है। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो बुधवार दोपहर जिस वक्त गुड्डू को पुलिस ने घेरा तो वे पुलिस पर गरम पड़ गए थे। मगर चारों ओर से घेराबंदी व पुलिस के तल्ख तेवर देख उन्होंने गिरफ्तारी दे दी। इसके बाद कुछ दूरी पर उनकी गाड़ी लिए खड़े ड्राइवर ने यह खबर उनके अधिवक्ता व परिवार को दी। मगर तब तक पुलिस गुड्डू को किसी अज्ञात स्थान पर ले गई। हालांकि कुछ ही देर में पुलिस ने गुड्डू की गिरफ्तारी की खबर सार्वजनिक कर दी।
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पिता की हत्या के बाद शुरू हुआ आपराधिक सफर
तेजवीर सिंह गुड्डू के आपराधिक जीवन पर गौर करें तो उनके पिता रामस्नेही की 5 फरवरी 1989 को पान दरीबा स्थित उनके दफ्तर में हत्या की गई। भाड़े के हत्यारों द्वारा जमीनी व व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में की गई इस हत्या के बदले गुड्डू ने अपराध की दुनिया में कदम रखा। शुरुआत में ही गुड्डू का नाम उस समय जिले की सबसे चर्चित हस्ती हरस्वरूप भैय्याजी (वरिष्ठ कांग्रेस नेता विवेक बंसल के पिता) की हत्या में आया। इसके बाद उन पर मुकदमे लगते चले गए। 

जल पुरुष को थप्पड़ मारने पर लगा रासुका
इसी बीच 1996 में राजनीति में भाग्य आजमाने उतरे। इगलास से पहला चुनाव लड़ा, मगर हार गए। 2000 में जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद वर्ष 2000 में उनके सिर पहला विवाद मैग्सेसे पुरस्कार विजेता जल पुरुष राजेंद्र सिंह को जिला पंचायत परिसर में आयोजित कार्यक्रम में खुद अध्यक्षता करते समय थप्पड़ मारने का लगा। बात इतनी सी थी कि राजेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में यह कह दिया था कि जनप्रतिनिधि विकास के नाम पर हमेशा निधि का रोना रोते रहते हैं। उस समय गुड्डू जिले की सक्रिय राजनीति में काफी चर्चित थे। उस घटना में सरेंडर करने के बाद उन पर रासुका के तहत कार्रवाई तक हुई। हालांकि कुछ साल पहले जलपुरुष द्वारा न्यायालय में गुड्डू को न पहचानने संबंधी बयान पर बरी कर दिया गया।
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पूर्व विधायक की हत्या में सरदार वेष में हाजिर
वर्ष 2005 में जिला पंचायत चुनाव के कुछ दिन बाद 20 मार्च 2006 की शाम को इगलास के पूर्व विधायक मलखान सिंह व उनके गनर की हत्या ज्ञान सरोवर स्थित उनके आवास पर हुई। चूंकि यह हत्या गुड्डू के चुनाव हारने के कुछ दिन बाद हुई, इसलिए शुरुआत में गुड्डू को इस हत्या की साजिश का आरोपी बनाया गया। बाद में हत्या का भी आरोपी बनाया गया। इस हत्या में गुड्डू की गिरफ्तारी के लिए तत्कालीन एसएसपी अखिल कुमार ने एड़ी चोटी का जोर लगाया। मगर गुड्डू ने कोर्ट में सरदार वेष में हाजिर होकर पुलिस को ही चैलेंज कर दिया था। यह प्रकरण बेहद सुर्खियों रहा।

फिर चुनावी तैयारी के बीच पैदा हुई बाधा
वर्ष 2010 के जिला पंचायत चुनाव में जेल में रहने के कारण गुड्डू दूर रहे। मगर 2015 के चुनाव में उनका पूरा दखल रहा। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर दावा ठोका। मगर टिकट कटने के कारण असफल हो गए। इस बार फिर वह तैयारी में लगे हुए थे। इससे पहले बेटों के झगड़े के विवाद ने उनके सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। राजनीतिक जानकार इस गिरफ्तारी को लेकर इतना ही कहते हैं कि बेशक गुड्डू दो बार सफल नहीं हुए, मगर उन्होंने अच्छे अच्छों का गणित बिगाड़ा। इस बार भी परिणाम उनके चुनाव में सक्रिय रहने के कारण कुछ ऐसे होने का अंदेशा व्यक्त किया जा रहा था।

2005 के चुनाव से शुरू हुई राजनीतिक जोरआजमाइश
2005 में रामसखी कठेरिया को जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जिताने में पूर्व विधायक मलखान सिंह के साथ-साथ जिले के दूसरे सियासी कद्दावर पूर्व मंत्री ठा.जयवीर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसी चुनाव से एमएलसी ठा. जयवीर सिंह ने जिला पंचायत की राजनीति में दबदबा बनाया जो अभी तक कायम है। पंद्रह वर्ष से ठा. जयवीर सिंह और तेजवीर सिंह के बीच जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर जोरआजमाइश जारी है, जिसमें तीन बार से ठा. जयवीर सिंह का खेमा लगातार जीतता आ रहा है। 2010 में ठा. जयवीर सिंह के नेतृत्व में चौ. सुधीर सिंह अध्यक्ष बने। वर्ष 2015 में उनके भतीजे उपेंद्र सिंह नीटू अध्यक्ष बने।

ये है 42 मुकदमों का आपराधिक सफर
तेजवीर सिंह गुड्डू के नाम दर्ज क्वार्सी थाने की हिस्ट्रीशीटर 64/ए के रिकार्ड पर गौर करें तो 1991 में तेजवीर सिंह गुड्डू का आपराधिक सफर शुरू हुआ। सबसे पहले उन पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद से अब तक कुल 42 मुकदमे दर्ज हुए हैं, जिनमें 10 हत्या के मुकदमे हैं। 4 बार रासुका के तहत कार्रवाई हो चुकी है और अब छठवीं बार गैंगेस्टर के तहत कार्रवाई हुई है। उन पर अलीगढ़ के क्वार्सी में 17, सिविल लाइंस में 7, गोंडा में 4, इगलास में 4, लोधा में 1, खैर में 1 के अलावा मथुरा में 1, हाथरस के हसायन में 3, बुलंदशहर कोतवाली में 2, मैनपुरी में 1 व राजस्थान के अलवर में 1 मुकदमा दर्ज है। 

मलखान सिंह हत्याकांड में ट्रायल जारी, बाकी में बरी
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तेजवीर सिंह गुड्डू पर दर्ज जमीनी धोखाधड़ी के इन ताजा मुकदमों को छोड़ दें तो सिर्फ मलखान सिंह हत्याकांड के मुकदमे को छोड़कर सभी में वे बरी हो चुके हैं। सभी मुकदमों में साक्ष्यों के अभाव में उन्हें दोषमुक्त करार दिया गया है। सिर्फ पूर्व विधायक मलखान सिंह हत्याकांड का मुकदमा अभी बुलंदशहर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में विचाराधीन है और उसका परीक्षण भी अंतिम दौर में चल रहा है।

गैंगेस्टर में सीज संपत्तियां भी हो चुकी हैं रिलीज
वर्ष 2011 में जिला प्रशासन ने गैंगेस्टर एक्ट के तहत तेजवीर गुड्डू के जापान हाउस स्थित घर और मैलरोज बाईपास स्थित एक अन्य संपत्ति को सीज कर थाना प्रभारी क्वार्सी को प्रशासक नियुक्त किया था। मगर न्यायालय ने बचाव पक्ष की पैरवी के चलते उन संपत्तियों को भी रिलीज कर दिया था।
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