राजा महेंद्र प्रताप सिंह विवि के शिलान्यास के मौके पर उनके वशंजों को यहां बुलाया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। ये भी कहना गलत न होगा कि पीएम और सीएम को कार्यक्रम में राजा के वशंजों की मौजूदगी की जानकारी ही न दी गई हो। अगर उनको जानकारी दी गई होती तो संभवत: राजा के वंशजों को भी मंच पर बुलाया जाता। दरअसल, प्रशासनिक अधिकारी इस वीवीआईपी कार्यक्रम की तैयारियों को पूरा करने और हर व्यवस्था को पुख्ता करने में इतना व्यस्त हो गए कि उनका ध्यान इस ओर नहीं गया। राजा के प्रपौत्र चरत प्रताप सिंह देहरादून से इस कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। उनको वीआईपी पास भी जारी किया गया था।
जीटी रोड स्थित रमाडा होटल में ठहरे चरत प्रताप सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन ने उनको इस कार्यक्रम में शामिल होने का न्यौता दिया था। वीआईपी पास भी जारी किया, लेकिन वाहन का कोई पास नहीं दिया गया। जिससे उनको वाहन पार्क करने में खासी परेशानी हुई। उन्हें अपना वाहन वीआईपी पार्किंग से काफी दूर पार्क करना पड़ा। जब वो कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन की तैयारियां हो रही थीं। उनको मंच के पास तक पहुंचना था, लेकिन वीआईपी पास से मंच के पास जाना मुश्किल हो गया था, क्योंकि एसपीजी के अधिकारियों ने वहां सभी का प्रवेश रोक दिया था, केवल वही लोग मंच के पास जा रहे थे, जिनके पास मंच से संबंधित अलग पास था। जिसको चेक करने के बाद एसपीजी उनको अंदर जाने दे रही थी। चरत प्रताप सिंह ने बताया कि एक प्रशासनिक अधिकारी ने इस काम की जिम्मेदारी एक अन्य अधिकारी को दी थी, लेकिन संभवत: वह भी व्यस्त हो गए थे। इसके साथ ही सभास्थल पर जैमर चालू होने से मोबाइल फोन का नेटवर्क चला गया था, जिससे किसी से बात नहीं हो पा रही थी। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ गए और कार्यक्रम शुरू हो गया।
चरत प्रताप सिंह ने बताया कि वह वीआईपी दीर्घा में रहे और पूरा कार्यक्रम देखा। उन्हें बड़ा गर्व है कि दशकों बाद ही सही केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने उनके परदादा के त्याग और बलिदान को समझा तो सही। वह प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री से नहीं मिल सके। ये अलग बात है, लेकिन उनके परदादा का जो सम्मान आज हुआ है, वह उन्हें हमेशा याद रहेगा। आजादी की लड़ाई में लंबा संघर्ष करने वाले उनके परदादा को दशकों बाद वो सम्मान मिल पाया है, जिसके वह सच्चे हकदार थे। उनके नाम पर विवि की स्थापना के बाद युवा पीढ़ी को उनका आजादी की लड़ाई में योगदान याद रहेगा। ये मेरे पूरे परिवार के लिए बहुत गर्व की बात है।