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अलीगढ़ : बीमा कंपनी को आंखों की सर्जरी का ब्याज समेत खर्च देना होगा

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आंखों की बीमारी में बीमा होने के बाद भी उसका क्लेम न देने पर उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने बीमा कंपनी को बीमे की रकम के साथ 9 फ़ीसदी ब्याज देने का आदेश दिया है। साथ ही एक हजार रुपये मानसिक कष्ट की क्षतिपूर्ति अदा करने का आदेश दिया है।
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सासनी गेट के पला रोड स्थित मोहल्ला गोपालपुरी निवासी प्रमिला भारद्वाज पत्नी राजीव भारद्वाज ने समद रोड स्थित ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के माध्यम से फैमिली फ्लोटर पॉलिसी ली थी। इस पॉलिसी में 19 मार्च 2015 से लेकर 18 मार्च 2016 तक बीमा अवधि कवर थी। इस दौरान प्रमिला भारद्वाज की बेटी को आंखों की बीमारी मायोपिया हो गई। इस बीमारी का इलाज प्रमिला भारद्वाज ने आंखों के प्रसिद्ध डॉक्टर पीएस हरदिया से कराया। दोनों आंखों का ऑपरेशन हुआ।
यह ऑपरेशन 3 जुलाई 2015 को किया गया। इसका खर्चा प्रमिला भारद्वाज ने वहन किया। जब उन्होंने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा गया तो बीमा कंपनी ने इंकार कर दिया। बीमा कंपनी ने दलील दी कि कांटेक्ट लेंस, कॉस्मेटिक सर्जरी आदि बीमा कवर में नहीं आती है। आंखों का उपचार भी इसी श्रेणी में है।
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इसके बाद प्रमिला भारद्वाज ने उपभोक्ता संरक्षण आयोग का दरवाजा खटखटाया। यहां पर बीमा कंपनी ने स्वीकार किया कि उपभोक्ता ने धनराशि अदा करके बीमा पॉलिसी ली थी। यह भी स्वीकार किया कि प्रमिला भारद्वाज की बेटी आंखों की सर्जरी हुई थी।
आयोग ने अपने परीक्षण में पाया कि प्रमिला भारद्वाज की बेटी की आंखों का ऑपरेशन बीमा कंपनी द्वारा निषेध किए गए उपचारों में नहीं आता है, इसलिए आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य आलोक उपाध्याय व पूर्णिमा सिंह राजपूत ने बीमा कंपनी को 34341 रुपए प्रमिला भारद्वाज को बीमा अवधि से अब तक 9 फ़ीसदी ब्याज के साथ अदा करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही 1000 रुपये मानसिक कष्ट की क्षतिपूर्ति और एक हजार रुपए वाद व्यय के रूप में अदा करने का आदेश दिया है।
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