अहोई अष्टमी पर अहोई माता की पूजा करती महिलाएं। विज्ञप्ति
- फोटो : CITY OFFICE
अहोई अष्टमी पर बृहस्पतिवार को माताओं ने निर्जला उपवास कर बेटों की लंबी उम्र एवं स्वास्थ्य जीवन की कामना की। माताओं ने दिन में अहोई माता की पूजा कर देर रात तारों को अर्घ्य देकर बेटों की लंबी उम्र की कामना की।
करवाचौथ पर्व पर सुहागिनें जिस प्रकार अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। उसी प्रकार अहोई अष्टमी के मौके पर संतान की सुख समृद्धि अथवा संतान की कामना लेकर महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। बृहस्पतिवार को महिलाओं ने दिनभर निर्जला उपवास रखा।
शाम को भक्ति भावना के साथ दीवार पर अहोई माता की पुतली में रंग भरे। उनके पास सेई के बच्च भी बनाए। अधिकांश महिलाओं ने अहोई माता के कैलेंडर अथवा चित्रों का प्रयोग किया। शाम को तारे निकलने पर महिलाओं ने अहोई माता की पूजा प्रारंभ की।
घर के एक स्थान पर आटे से चौक बनाकर कलश रखा। पूजा-अर्चना कर अहोई अष्टमी व्रत कथा को सुना। एक कटोरी में हलवा तथा रुपयों का बायना निकालकर रखा। यह बायना पूजा के बाद महिलाओं ने अपनी सास अथवा पूज्यनीय महिलाओं को दिया। पूजा के बाद 11 बजे तक चंद्रमा के उदय होने के लिए महिलाएं बेचैन दिखीं। देर रात चंद्रमा दिखा तो महिलाओं ने अर्घ्य देकर अपना व्रत खोला।
अहोई अष्टमी पर अहोई माता की पूजा करती महिला साथ बेटा अंश ।- फोटो : CITY OFFICE