भूगोल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी ने बताया कि इस मौसम गुब्बारे का फायदा किसानों को होगा। मौसम पूर्वानुमान से प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
32 किमी की ऊंचाई पर था ऋणात्मक 80 डिग्री सेल्सियस तापमान
प्रो. अतीक अहमद ने बताया कि 11 जुलाई को मौसम गुब्बारा 32 किलोमीटर ऊपर जाकर फट गया था। उस वक्त रेडियोसोंड उपकरण में दर्ज किए गए आंकड़े के अनुसार, वहां का तापमान ऋणात्मक 80 डिग्री सेल्सियस था, जब वह नीचे आया, तब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस था। इसी तरह आर्द्रता 32 किलोमीटर पर 90 थी और जमीन पर 70 दर्ज की गई है।
एक गुब्बारे पर आता है 40 हजार का खर्च
प्रो. अतीक अहमद ने बताया कि एक मौसम गुब्बारा छोड़ने पर 40 हजार रुपये का खर्च आता है। एएमयू ने 30 गुब्बारे मंगाए हैं। पहला गुब्बारा छोड़ा जा चुका है। अब हर 15 दिन में गुब्बारा छोड़ा जाएगा। दूसरा गुब्बारा 26 जुलाई को छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि जब गुब्बारा फटता है, तब रेडियोसोंड उपकरण नीचे आ जाता है। इस रेडियोसोंड पर मोबाइल नंबर और पता लिखा होता है। अगर किसी को मिल जाए तो वह संबंधित मोबाइल नंबर पर कॉल करके उपकरण दे सकता है। इससे काफी रुपये की बचत हो सकती है, लेकिन ऐसा मुमकिन नहीं होता है। उन्होंने कहा कि पहले शोधार्थी थ्योरी में जलवायु परिवर्तन की जानकारी पढ़ते थे, लेकिन अब उन्हें प्रैक्टिकल करके दिखाया गया है। रेडियोसोंड से मिले डेटा का विश्लेषण किया जाएगा।
अब लाइटनिंग उपकरण छोड़ा जाएगा, बिजली गिरने का होगा पूर्वानुमान
इस प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि जल्द ही लाइटनिंग (बिजली) उपकरण भी छोड़ा जाएगा। इससे बिजली गिरने का पूर्वानुमान हो जाएगा। मछुआरों को पहले आगाह कर दिया जाएगा। इसी तरह पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को बादल फटने और भूस्खलन के बारे में भी पहले से जानकारी मिल जाएगी।