शरई अदालत (दारुल कजा) में खुला (बीवी की ओर से शौहर से अलग होना), तलाक, निकाह, तरका (वालिद की जायदाद में बेटी का हिस्सा), घरेलू झगड़े के मामले आते हैं। यहां कुरान, हदीस की रोशनी में फैसले दिए जाते हैं। इस अदालत के फैसलों को मानने के लिए कोई पाबंद नहीं है और न ही इन फैसलों को कानूनी दर्जा हासिल है।
केस-1
अतरौली निवासी एक दंपती के बीच रोजाना झगड़ा होता था, दोनों के कोई संतान नहीं थी। इससे आजिज आई महिला खुला के लिए शरई अदालत पहुंची। उसके शौहर को खुला लेने का आदेश भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। दूसरी बार में शौहर शरई अदालत में हाजिर हुआ। पहले समझाया गया, लेकिन बात नहीं बनी तो खुला दे दिया गया।
केस-2
छर्रा में भी मियां-बीवी के बीच किसी न किसी बात को लेकर विवाद रहता था और नौबत मारपीट तक पहुंच गई थी। शौहर बीवी से तलाक लेना चाहता था। घरवालों ने भी उसका साथ दिया और तलाक का मामला शरई अदालत तक ले गए। अदालत ने पत्र भेजकर बीवी को शरई अदालत में हाजिर होने के लिए बुलाया। बाद में दोनों में तलाक हो गया।