बच्चे चोरी करके बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद वह लोग भी कानून की कार्रवाई के दायरे में आए हैं, जिन्होंने पैसा देकर बच्चा हासिल किया था। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि किसी नि:संतान दंपती द्वारा बच्चे को गोद लेने की वैधानिक प्रक्रिया क्या है। वरिष्ठ अधिवक्ता रामकृष्ण तिवारी कहते हैं कि भारत में बच्चा गोद लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें हैं, जिनको पूरा करना आवश्यक होता है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने बच्चा गोद लेने के लिए सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) गठित की है। ये संस्था महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है। बच्चा गोद लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन cara.nic.in के पेरेंट्स ऑप्शन पर जाकर किया जा सकता है। पंजीकरण के 30 दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेज वेबसाइट पर अपलोड करने होते हैं।
ये कागजात हैं जरूरी
- बच्चे को गोद लेने के इच्छुक परिवार की ताजा तस्वीर या फिर उस दंपती और शख़्स की ताजा तस्वीर।
- गोद लेने वाले का पैन कार्ड
- जन्म-प्रमाणपत्र
- निवास प्रमाण पत्र (आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, नवीनतम बिजली का बिल, टेलीफ़ोन बिल में से कोई एक)
- इनकम टैक्स की प्रामाणिक कॉपी
- किसी सरकारी चिकित्सा अधिकारी का हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र, जिससे इस बात की पुष्टि होती हो कि जो शख़्स बच्चे को गोद लेने जा रहा है, उसे किसी तरह की कोई गंभीर बीमारी तो नहीं है। गोद लेने के इच्छुक दंपती को अपने-अपने मेडिकल सर्टिफ़िकेट जमा कराने होंगे।
- शादी का प्रमाण पत्र (अगर शादीशुदा हैं तो)
- अगर शख़्स तलाक़शुदा है तो उसका प्रमाणपत्र
- गोद लेने के पक्ष में इच्छुक व्यक्ति से जुड़े दो लोगों का बयान
- इच्छुक व्यक्ति का कोई बच्चा पहले से ही है और उसकी उम्र पांच साल से अधिक है तो उसकी सहमति।
दंपती को इन योग्यताओं को पूरा करना जरूरी
- संभावित मां-बाप शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक दृष्टि से सक्षम होने चाहिए।
- संभावित अभिभावकों को कोई जानलेवा बीमारी न हो।
- संभावित अभिभावक शादीशुदा हैं तो उन दोनों की आपसी सहमति होना जरूरी है।
- एकल महिला किसी भी लिंग के बच्चे को गोद ले सकती है |
- एकल पुरुष सिफ़ॱर लड़के को ही गोद ले सकता है।
पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहती है
बच्चों के कल्याण और उनके पुनर्वास के लिए काम करने वाली संस्था चाइल्डलाइन के डॉ ज्ञानेंद्र मिश्रा कहते हैं कि एक बार पंजीकरण हो जाने के उपरांत स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी या जिला बाल संरक्षण इकाई के माध्यम से गोद लेने वाले परिवार का गृह सर्वेक्षण किया जाता है। जिसे तीस दिनों के भीतर ऑनलाइन भेज दिया जाता है। जिसके बाद गोद लेने वाले दंपती को प्रतीक्षा सूची में डाल दिया जाता है। जिसे दंपती समय समय पर ऑनलाइन देख सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी होती है।
कई श्रेणियों में बांटी गई है प्रक्रिया
ये सारी योग्यताएं एक आम भारतीय नागरिक के लिए होती हैं। लेकिन गोद लेने की प्रक्रिया को कई श्रेणियों में बांटा गया है एनआरआई, इंटर-स्टेट, सौतेले माता-पिता या फिर रिश्तेदारों द्वारा गोद लेने के लिए अलग-अलग नियम हैं |