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पापा अब मैं किसी के लिए बोझ नहीं बन सकती हूं...नौकरी न मिलने से निराश युवती ने दी जान

Thu, 18 Jun 2020 09:59 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • शाहगंज की रामस्वरूप कॉलोनी की घटना
  • कमरे में फंदे पर लटका मिला शव
  • सुसाइड नोट में लिखी मार्मिक बातें
  • परिवार में मचा कोहराम
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मेनका का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एमए, बीएड और टेट पास करने के बाद भी नौकरी नहीं मिलने से निराश युवती मेनका सिसौदिया (30) ने बुधवार को फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। उस समय घर में कोई मौजूद नहीं था। दोपहर में पिता ने फोन नहीं उठाने पर परिचितों को घर भेजा। घर में मेनका का शव फांसी पर लटका मिला।
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सूचना पर पुलिस पहुंच गई। पुलिस को कमरे से छात्रा का सुसाइड नोट मिला। इसमें उसने नौकरी नहीं मिलने की वजह से परिवार के लिए कुछ नहीं कर पाने को प्रमुख वजह बताया है। शाहगंज की रामस्वरूप कॉलोनी निवासी मेनका सिसौदिया के पिता राजेंद्र सिसौदिया सिक्योरिटी एजेंसी में गार्ड हैं।

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पिता ने पुलिस को बताया कि बेटी ने एमए करने के बाद बीएड और टेट पास कर लिया। इसके बाद नौकरी के लिए प्रयासरत थी। उसने मन में ठान रखी थी। पहले अपना करियर बना लेगी, तभी शादी करेगी। उससे छोटे भाई ओमकार की कुछ साल पहले शादी हो चुकी थी।

मेनका ने कई प्रतियोगी परीक्षाएं दीं, लेकिन उसे मनमाफिक नौकरी नहीं मिल रही थी। पिता उसे समझाते थे। मगर, वह तनाव में आ गई थी। मेनका की भाभी पांच दिन पहले अपने मायके चलीं गयीं। बुधवार सुबह भाई फैक्टरी गया हुआ था। पिता अपने गांव कौरई फतेहपुर सीकरी, फसल काटने गए थे। 

फोन मिलाते रहे... उठा नहीं
राजेंद्र सिसौदिया ने बताया कि वह सुबह से मेनका को फोन मिला रहे थे। मगर, फोन रिसीव नहीं हो रहा था। उन्होने दोपहर में पास में रहने वाले परिचित को घर भेजा। उसके काफी आवाज देने के बाद भी जब मेनका बाहर नहीं आयी। परिचित अंदर कमरे में पहुंचा तो मेनका का शव पंखे पर दुपट्टे से बने फांसी के फंदे पर लटका मिला।

पापा, मुझे माफ करना, लोग आपको ताना देते हैं
थाना प्रभारी निरीक्षक सत्येंद्र सिंह राघव ने बताया कि मेनका के कमरे से एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें लिखा था कि मैं अपनी मर्जी से खुदकुशी कर रही हूं। पापा मुझे माफ कर देना। मेरा जीने का मन नहीं था। लोग आपको मेरी वजह से ताना देते हैं। मेरे बाद किसी को परेशान नहीं किया जाए। मैं अपनी मौत के लिए खुद ही जिम्मेदार हूं।
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अब मैं किसी के लिए बोझ नहीं बन सकती हूं
पापा मुझे माफ करना। मेरी वजह से आपको काफी परेशानी हुई। अब मैं किसी के लिए बोझ नहीं बन सकती। मैं कुछ बनकर आपके और परिवार के लिए कुछ करना चाहती थी। मगर, आपके लिए कुछ नहीं कर पाई। सोचा था कि नौकरी लग जाएगी तो किसी को दुखी नहीं रहने दूंगी। मैं अपने भतीजे और भतीजी से प्यार करती हूं। कुछ गहने और रुपये हैं। मैं उनके नाम करती हूं।

भाई को मां की कमी महसूस नहीं होने दी
मेनका परिवार की लाडली थी। उसकी मां की कई साल पहले मौत हो गई थी। वह भाई के साथ ही भतीजे और भतीजी का ख्याल रखती थी। भाई को मां की कमी नहीं महसूस होने दी। उससे बहुत प्यार करती थीं। मेनका की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। इंस्पेक्टर शाहगंज सतेंद्र सिंह राघव ने बताया कि छात्रा ने सुसाइड नोट में अपनी मौत का जिम्मेदार खुद को ठहराया है।
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