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'मौत' का यमुना एक्सप्रेस-वे: 11 साल में हुए हादसों में 1320 ने गंवाई जान, सामने आई बड़ी वजह; बरतें ये सावधानी

Thu, 28 Nov 2024 10:08 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा

सार

यमुना एक्सप्रेस-वे पर 11 साल में हादसों में 1320 ने जान गवांई है। झपकी और ओवरस्पीडिंग प्रमुख वजह बन रही हैं। अधिवक्ता केसी जैन को सूचना के अधिकार में ये जानकारी मिली है। 

 
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यमुना एक्सप्रेस वे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यमुना एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार तड़के हादसे में सदर के खेलकूद के सामान के व्यापारी सहित दो की माैत हुई थी। बुधवार को लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर तीन डाक्टरों सहित पांच की माैत हो गई। इन घटनाओं ने एक बार फिर एक्सप्रेस-वे पर सफर करने वालों के लिए चिंता खड़ी कर दी है।
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यमुना एक्सप्रेस-वे की बात करें तो यहां पर 11 साल में 7425 हादसे हो चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा हादसे नींद और झपकी आने से हुए। 1320 लोगों की माैत हुई, जबकि 11168 लोग घायल हुए। यह आंकड़ा काफी ज्यादा है। आगरा से ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाले 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेस-वे पर होने वाले सड़क हादसों का मुख्य कारण वर्ष 2012 से 2023 तक वाहन चालक को झपकी आना सबसे अधिक रहा है। यह बात यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने सूचना अधिकार अधिनियम में 26 मार्च 2024 को वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन को 26 मार्च उपलब्ध कराई थी।

 

सूचना में यह भी सामने आया था कि वर्ष 2023 में वर्ष 2022 की अपेक्षा यमुना एक्सप्रेस-वे पर 100 सड़क हादसे अधिक हुए हैं। यही नहीं जहां वर्ष 2022 में 311 सड़क हादसे हुए थे, जबकि वर्ष 2023 में सड़क हादसों की संख्या 411 थी। वर्ष 2023 में घायलों की संख्या 725 थी। वर्ष 2022 में यह संख्या 621 थी। 104 व्यक्ति अधिक घायल हुए।

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थोड़ी सी राहत भरी खबर यह भी है कि वर्ष 2023 में 2022 के मुकाबले यमुना एक्सप्रेस-वे के सड़क हादसों में कम लोगों की मौत हुई। वर्ष 2023 में 92 लोगों की तथा वर्ष 2022 में 102 की मौत हुई। कुल मिलाकर वर्ष 2023 में यमुना एक्सप्रेस-वे पर सड़क हादसों में औसतन 4 दिनों में एक व्यक्ति की मौत हो गई और प्रतिदिन घायल होने वालों की संख्या औसतन दो थी।

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522 की झपकी तो 201 की मौत ओवरस्पीडिंग से हुई
सूचना के प्रकाश में यदि यमुना एक्सप्रेस-वे के सड़क हादसों की संख्या की बात करें, तो वर्ष 2012 से वर्ष 2023 तक 7,625 हादसे हुए, जिनमें से झपकी लगने के कारण हुये हादसे 3,364 थे। ओवरस्पीडिंग के कारण 1,304 हादसे थे। इस अवधि में सभी हादसों में 1,320 लोगों की मौत हो गई, जिसमें से 522 लोगों की मौत झपकी आने से हुई और 201 लोगों की मौत ओवरस्पीडिंग के कारण हुई। इस अवधि में घायलों की संख्या 11,168 थी जिसमें से 4,181 लोग झपकी आने के कारण हुए। सड़क हादसों में घायल हो गए और 1,819 लोग ओवरस्पीडिंग के कारण घायल हुए।

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बनाई जाए प्रभावी योजना
वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन मांग कर चुके हैं कि पिछले 12 वर्षों के यमुना एक्सप्रेसवे के सड़क हादसों का मुख्य कारण झपकी आने का जो कारण निकलकर आया है, उसको सड़क सुरक्षा नीति का मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए। ताकि इस कारण से होने वाले हादसों में कमी आ सके। इसके लिए यह जरूरी है कि देर रात वाहनों के आवागमन को रोका जाए। वाहन स्वामियों और ड्राइवरों के मध्य जागरूकता अभियान चलाया जाए। एक साथ ड्राइविंग कितने घंटे की जा सकती है और कितनी-कितनी देर बाद रुकना चाहिए यह भी निर्धारित किया जाना चाहिए।
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