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#KabTakNirbhaya: 'अपराधियों को मिले ऐसी सजा कि कठोर यातनाएं सहते हुए मौत को तरसे'

Wed, 04 Dec 2019 12:02 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
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अपराजिता कार्यक्रम में महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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हैदराबाद कांड के बाद महिलाओं में उबाल है। फिरोजाबाद में अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत मंगलवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने जघन्य घटना पर गम के साथ गुस्सा व्यक्त किया। महिलाओं ने कहा कि दुष्कर्म के आरोपियों को फांसी की सजा तो आसान है, ऐसी सजा मिलनी चाहिए कि वो पल-पल कठोर यातनाओं के साथ अपनी मौत का इंतजार करें।
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अधिवक्ता तूलिका अग्रवाल ने कहा कि दुष्कर्म की शिकार बेटी को जलाने वाले नरपिशाचों के लिए फांसी तो बहुत आसान सजा है। दुष्कर्म के आरोपियों को एक हाथ एक पैर काट कर और नपुंसक बना कर समाज के बीच छोड़ देना चाहिए। ताकि वो भी पल-पल उस यातना को झेले जो दुष्कर्म पीड़िता ने सहन की थी। 

अलग से कानून और कोर्ट बने- डा. विनीता गुप्ता 

दाऊदयाल डिग्री कॉलेज की प्राचार्या डॉ. विनीता गुप्ता ने कहा कि अब वो जमाना नहीं कि गलत होने पर भी बेटियां चुप रहें। बदनामी का डर हैवानों का हौसला बढ़ाता है। न्याय तुरंत नहीं होता इसलिए ऐसे लोगों के हौसले बढ़ते हैं। छह साल से अधिक हो गए निर्भया कांड के आरोपी अब तक जिंदा हैं। बेहतर यह होगा कि दुष्कर्म जैसे मामलों के लिए अलग से कानून और कोर्ट हो।
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कानून की विसंगतियां खत्म होनी चाहिए- नंदनी यादव 

आईवी इंटरनेशनल स्कूल की प्रधानाचार्य नंदनी यादव ने कहा कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने और चौराहों पर मोमबत्तियां जलाने से ऐसी घटनाएं नहीं रुक सकती हैं। निर्भया कांड के बाद कानून कई बने पर क्या घटनाएं थमीं। 

उन्होंने कहा कि 17 साल का नाबालिग घिनौना अपराध करता है और उसे हमारा कानून नाबालिग मानकर छोड़ देता है। जब तक कानून की विसंगतियां खत्म नहीं होंगी अपराध थमने वाले नहीं। ऐसे लोगों को समाज में जीने का हक नहीं, तुरंत सख्त से सख्त सजा दे डालो। 

अपराधियों का मनोबल टूटे ऐसा कानून बने- डॉ. मिली अग्रवाल 

महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. मिली अग्रवाल ने कहा कि समाज में नैतिक पतन के कारण इस तरह के जघन्य अपराध हो रहे हैं। बेटियों को सबल बनाने की जरूरत है। कानून इतना सख्त बनाया जाए कि अपराधियों का मनोबल टूटे। दुष्कर्म के मामलों में सुनवाई जल्द से जल्द हो। लचर कानून का ऐसे लोग लाभ उठाते हैं। 
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तारीख पर तारीख न मिले- शोभना दीक्षित 


गृहणी शोभना दीक्षित ने परिवार के संस्कारों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहले तो परिवार से ऐसे संस्कार बचपन से दिए जाएं कि व्यवहार में हैवानियत का स्थान ही न रहे। उन्होंने कहा कि कानून ऐसा बने कि तारीख पर तारीख न मिलें बल्कि तुरंत फैसला हो। 

सार्वजनिक सजा दी जाए - सरिता मित्तल 

जायंट्स ग्रुप की फेडरेशन अधिकारी सरिता मित्तल ने कहा कि दुष्कर्म के आरोपियों को जो भी सजा दी जाए सार्वजनिक दी जाए। ऐसे लोगों में दंड का भय पैदा होना चाहिए। न्याय की प्रक्रिया बहुत धीमी है इसमें भी सुधार की जरूरत है।

बीएड की छात्रा शिवांगी जैन ने कहा कि बेटियां को दुर्बल नहीं सबल बनाएं। बेटियों को डराएं नहीं आत्मनिर्भर बनाएं। मां-बहनों के साथ घिनोना कृत्य करने वाले लोगों के अंदर पनप रहे गंदे कीड़े का इलाज यही है कि उसे फांसी न देकर नपुंसक बना कर छोड़ दिया जाए। यह समाज दुष्कर्म पीडिता के परिजनों के हाथों दिलाई जाए। 
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