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जोनल पार्क में हरे पेड़ काटने पर 4 के खिलाफ वन अपराध दर्ज

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आगरा। ताजनगरी के जोनल पार्क में पांच साल पुराने 15 से ज्यादा हरे पेड़ों को काटने के मामले में वन विभाग ने शुक्रवार को वन अपराध दर्ज कर लिया। आगे की जांच वन विभाग के रेंजर को सौंपी गई है। वन विभाग ने ठेकेदार समेत तीन लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। रेंजर की जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई करेगा। वहीं आगरा विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों ने पेड़ काटने से इंकार करते हुए आंधी में पेड़ गिरना बताया है। एडीए उपाध्यक्ष ने वन विभाग की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही एफआईआर दर्ज करने की बात कही है।
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आगरा स्मार्ट सिटी की तरह ही आगरा विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों ने एडीए उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र पैंसियां को गुमराह करने वाली रिपोर्ट दे दी। इंजीनियरों ने कहा कि आंधी में जोनल पार्क के पेड़ टूट गए। वन विभाग के नियमों के मुताबिक आंधी में टूटे पेड़ को रखना अनिवार्य है और इसकी सूचना देनी होती है। जोनल पार्क में जो पेड़ काटे गए, वह प्रथमदृष्ट्या आरी से और ब्लेड से काटे गए। क्षेत्रीय निवासी राजीव सक्सेना ने बताया कि उनके ठूंठ देखकर स्पष्ट है कि पेड़ आंधी में नहीं गिरे, बल्कि काटे गए। जेसीबी से उखाड़ने के वीडियो भी मौजूद हैं।
कई पेड़ काटे जाने की शिकायत
जोनल पार्क में हरे पेड़ काटने के मामले में हमने वन अपराध दर्ज किया है। वहां कई पेड़ काटे जाने की शिकायत है। मामले की जांच रेंजर को सौंपी गई है। इस पार्क में वर्ष 2016 का पौधरोपण था। जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई कराई जाएगी।
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-अखिलेश पांडेय, डीएफओ
जांच रिपोर्ट के बाद एफआईआर
मेरे अधिकारियों ने बताया है कि पेड़ आंधी में टूटकर गिर गया था। वन विभाग वन अपराध दर्ज करने और जांच के बाद अगर रिपोर्ट सौंपेगा तो हम एफआईआर करा देंगे। अभी रिपोर्ट हमें मिली नहीं है।
-डॉ. राजेंद्र पैंसिया, उपाध्यक्ष, एडीए
पार्क में व्यावसायिक गतिविधियां कैसे- शरद गुप्ता
एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट में पर्यावरण, हरियाली से जुड़े मामलों के केस लड़ रहे प्रमुख चिकित्सक डॉ. शरद गुप्ता ने ताजनगरी के जोनल प्लान में एडीए की ओर से आगरा चौपाटी के लिए काटे गए पेड़ों पर आपत्ति जताई है। उन्होंने ताजमहल से महज दो किमी दूर आगरा विकास प्राधिकरण की ओर से दुकानों के निर्माण के लिए पेड़ काटने पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एमसी मेहता को भी जानकारी दे दी है। डॉ. शरद गुप्ता ने एडीए से आपत्ति जताई है कि बिना लैंड यूज बदले दुकानों का निर्माण पार्क में कैसे किया गया जबकि जोनल पार्क जैसे महत्वपूर्ण पार्क में दुकानें कैसे बनाई र्गइं। 10 फीसदी पक्का निर्माण फुटपाथ, वाटरटैंक, ओपन एयर थियेटर आदि के लिए होता है न कि व्यावसायिक गतिविधियों दुकान आदि के लिए। दुकान बनने पर गंदगी, शोर, प्रदूषण आदि से जोनल पार्क का पूरा पर्यावरण ही बदल जाएगा। एडीए को चौपाटी बनानी है तो कहीं और इसी पार्क के पास व्यावसायिक जमीन पर बनाए। पार्क में चौपाटी बनाने के मामले में वह विधिक कार्यवाही कराएंगे।
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