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सोचा था बुढ़ापे में सहारा बनेंगे, बेटे तो पहले ही चले गए

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शमसाबाद में मृतको के परिवार की महिलाए विलाप करती हुई - फोटो : Agra Dehat
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शमसाबाद। गुजरात के गांधीनगर की दवा फैक्टरी के टैंक में जहरीली गैस से दो श्रमिकों की जान बचाने की कोशिश में शमसाबाद के तीन युवक अनीस, राजन और देवेंद्र की शनिवार को मौत हो गई थी। सोमवार को इनके शव घर पहुंचे, तो कोहराम मच गया। हादसे में दो बेटों को गंवाने वाले पप्पू तो बिलखते हुए यही कहते रहे कि सोचा था बेटे बुढापे में सहारा बनेंगे लेकिन वे तो पहले ही चले गए।
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सोमवार को दोपहर करीब एक बजे जैसे ही युवकों के शव शमसाबाद पहुंचे, मोहल्ले वालों की भीड़ जुट गई। परिजनों का रोना देखकर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गयी। अनीस और राजन के पिता और मां तो रोते हुए बार-बार बेटों का आखिरी बार चेहरा देखने के लिए शवों को खोलने लग जा रहे थे। वहीं शवों के आने की सूचना पर थाना पुलिस भी पहुंची। बाद में पुलिस की मौजूदगी में शवों को अंतिम संस्कार किया गया।
हादसे में मृत देवेंद्र उर्फ सेठी का शव जैसे ही घर पहुंचा तो उसका छोटा भाई उसे देखते ही बेहोश हो गया। परिजन उसे पानी पिलाकर बार बार होश में लाने का प्रयास कर रहे हैं। लोगों ने बताया कि देवेंद्र ही परिवार में अकेला कमाने वाला था।
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