कासगंज। जिले में सबसे अधिक मतदान का रिकॉर्ड पटियाली के नाम है। वर्ष 1996 में हुए चुनाव में इस विधानसभा के मतदाताओं ने जो उत्साह दिखाया वैसा उत्साह जिले में न तो इससे पहले के चुनावों में नजर आया और न ही इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में देखने को मिला। जिले की तीन विधानसभाओं के लिए आजादी के बाद से अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इसके अलावा तीनों विधानसभाओं में एक एक बार उपचुनाव हो चुका है। 1952 के चुनाव में पहली बार हुए चुनाव को लेकर मतदाताओं में मतदान को लेकर काफी उत्साह रहा, लेकिन इस चुनाव में भी जिले के मतदाताओं ने 60 प्रतिशत मतदान के अंक को नहीं छुआ।
इस चुनाव में सबसे अधिक मतदान कासगंज वेस्ट विधानसभा में 47.32 प्रतिशत रहा। जबकि कासगंज ईस्ट में 46.78 प्रतिशत एवं कासगंज नोर्थ में 44.62 प्रतिशत वोट पड़े। इन चुनावों में जिले में मतदान के दौरान उतार चढ़ाव होता रहा है। जिले में मतदाताओं को प्रथम श्रेणी में पास होने के लिए 17 साल का लंबा सफर तय करना पड़ा। सबसे पहले कासगंज विधानसभा के मतदाता वर्ष 1969 में प्रथम श्रेणी में पास हुए। चुनाव में इस विधानसभा के 62.41 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जबकि पटियाली के मतदाता प्रथम श्रेणी में पास होने से चूक गए। यहां 59.53 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले। इसके बाद 1974 में हुए मतदान में जिले में कासगंज में सबसे अधिक 65.06 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
जबकि पटियाली में 61.88 प्रतिशत मतदाता वोट डालने के लिए पहुंचे। वर्ष 1996 में पटियाली के मतदाताओं में जबर्दस्त उत्साह दिखाया। यहां 67.30 प्रतिशत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए बूथों तक पहुंचे। वहीं कासगंज में 61.65 प्रतिशत मतदान हुआ। इसके बाद वर्ष 2002, वर्ष 2007 एवं 2012 के चुनावों में मतदाताओं में उत्साह की कमी देखी गई, जिससे मतदान का प्रतिशत गिर गया।
वर्ष 2017 के चुनाव में मोदी लहर में मतदाताओं ने वोट डालने में फिर से अपना उत्साह दिखाया। लेकिन वर्ष 1996 के चुनाव में पटियाली में बना रिकार्ड नहीं टूट सका। इस चुनाव में कासगंज में सबसे अधिक63.67 प्रतिशत, अमांपुर में 62.76 प्रतिशत एवं पटियाली में 61.82 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अब 2022 विधानसभा चुनाव के लिए जिले में 20 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। इस चुनाव के लिए प्रशासन ने मतदाताओं को जागरूक करने के लिए काफी प्रयास किए हैँ। मतदाताओं के लिए पोर्टल के माध्यम से शपथ दिलाई जा रही है। वहीं जागरूकता के लिए प्रतियोगिताओं आदि का आयोजन भी स्वीप के तहत किए गए हैँ। अब देखना यह है कि मतदाता इस रिकार्ड के लिए तोड़ पाते हैं या नहीं।
1977 के चुनाव में कम मतदान का भी बना था रिकॉर्ड
वर्ष 1977 के चुनाव में जनता लहर में कम मतदान का भी रिकॉर्ड बना। इस चुनाव में सोरों विधानसभा में 37.12 प्रतिशत मतदाताओं ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इतना मतदान अभी तक जिले में इतना कम वोट किसी विधानसभा चुनाव में नहीं पड़ा। जबकि कासगंज में 44.77 प्रतिशत एवं पटियाली में सबसे अधिक 52.92 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले।