फिरोजाबाद। दशलक्षण महापर्व पर मंदिरों में श्रद्घालुओं की भीड़ रही। मंदिरों में भक्तिभावना के साथ पूजा-अर्चना की। नसियाजी जैन मंदिर और श्री छदामीलाल जैन मंदिर में प्रवचन, पूजन और विधान के आयोजन हुए। जैनाचार्य विवेक सागर ने प्रवचन में कहा कि संयम का पालन करने से आनंद की अनुभूति होती है।
जैनाचार्य विवेक सागर ने कहा कि हमारे जीवन में लक्ष्य होना चाहिए। संयम होना चाहिए। उसी व्यक्ति को याद किया जाता है जिसमें अच्छाई होती है। जिसके जीवन में संयम होता है। यदि हमारे जीवन में संयम होगा तो हम आनंद की अनुभूति कर सकते है। यदि हमारे जीवन में प्रमाद का रंग चढ़ गया तो हमारा जीवन नष्ट हो जाएगा। इस लिए आनंद की अनुभूति के साथ अपने जीवन को जोड़ने की कोशिश करना। संयम मुक्ति का साक्षात कारण है।
दु:खों से छूटने का एकमात्र उपाय संयम है। बिना संयम के धारण किए तीर्थंकर को भी मोक्ष प्राप्त नहीं होता । हमें भी संयम को अंगीकार करके अपने इस दुर्लभ मानव जीवन को सफल करना है। पहले हम छोटे-छोटे नियम लें अपने जीवन को थोड़ा संयमित करें। धीरे-धीरे संयम के मार्ग पर चलने का प्रयास करें।
वहीं श्री छदामीलाल जैन मंदिर में भी जैनाचार्य सुरत्न सागर महाराज के सानिध्य में शांतिनाथ विधान का आयोजन किया गया। मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। अतिशय क्षेत्र चंद्रप्रभु मंदिर, जैन नगर खेड़ा में पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, गांधी नगर, नई बस्ती बाहुबलि दिगंबर जैन मंदिर में भी पूजा-अर्चना की गई।
स्वयं संयमित होने के साथ ही बच्चों को भी संयमित बनाएं: ऋषभ
शिकोहाबाद। दशलक्षण पर्व के छठवें दिन जैन मंदिरों में भक्ति की धूम रही। श्रीजी के अभिषेक के बाद सामूहिक पूजन किया गया। इस दौरान शास्त्र सभा में संयमित जीवन जीने पर बल दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में समाज के बच्चों और महिलाओं ने प्रस्तुत दी। ऋषभ कुमार जैन शास्त्री ने संयम धर्म की व्याख्या की।
उन्होंने कहा कि संयम का अर्थ है अपने ऊपर नियंत्रण। नियंत्रण जरूरी है। घोड़े को लगाम, हाथी को अंकुश, ऊंट को नकेल, वाहनों में ब्रेक बहुत आवश्यक हैं। बिना ब्रेक की गाड़ी लाखों रुपये की होने के बाद भी बेकार है। उन्होंने कहा कि स्वयं संयमित हों और अपने बच्चों को भी संयमित बनाएं।
नसियाजी, पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर और मंडी श्रीजी महावीर जिनालय में भी धार्मिक कार्यक्रम कार्यक्रम हुए। संवाद