1000 एकड़ में प्रस्तावित है थीम पार्क योजना।
10,000 करोड़ रुपये की लागत से बनता पार्क।
323 हेक्टेयर जमीन का एडीए ने किया अर्जन।
170 हेक्टेयर जमीन का अर्जन प्रशासन ने किया।
300 करोड़ रुपये का मुआवजा बांट चुका है एडीए।
02 गांवों की जमीन का किया गया है अधिग्रहण।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अखिलेश यादव सरकार ने शहर में सेवन वंडर्स सिटी थीम पार्क बनाने की योजना की तैयार की थी। फिल्म निर्माता निर्देशक संजय खान के सहयोग से बनाई जा रही इस योजना के तहत जमीन का अधिग्रहण हो चुका है लेकिन अभी तक इस ओर कोई काम नहीं हुआ है, ऐसे में किसान अब जमीन पर घमासान कर सकते हैं।
योजना के तहत करीब 1000 एकड़ भूमि पर थीम पार्क बनाना है। एडीए ने लैंड पार्सल योजना के तहत अधिग्रहीत की करीब 332 हेक्टेयर भूमि यूपीएसआईडीसी के हवाले कर दी। शेष करीब 170 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रशासन ने भूमि अध्याप्ति के माध्यम से कराया। इस जमीन का भी कब्जा यूपीएसआईडीसी को दे दिया गया है। रिंग रोड के बराबर से रहनकला और रायपुर गांव की प्राइम लोकेशन की इस जमीन पर अभी भी खेती हो रही है। सूत्रों का कहना है कि थीम पार्क योजना पर करीब 10,000 करोड़ रुपये निवेश प्रस्तावित है। इसके लिए संजय खान थीम पार्क में जिन विदेशी कंपनियों के साथ करार करने की योजना बना रहे थे उन्होंने आगरा में प्रस्तावित इस योजना पर दिलचस्पी नहीं दिखाई है। इस वजह से योजना आगे नहीं बढ़ पाई है। इससे विकास प्राधिकरण को भी नुकसान उठाना पड़ा है। दरअसल एडीए ने लैंड पार्सल के 332 हेक्टेयर जमीन आवासीय योजना बसाने के लिए अधिग्रहीत की थी। थीम पार्क की वजह से यह जमीन एडीए के हाथ से चली गई। अब किसान भी इस योजना का विरोध कर सकते हैं।
गंगाजल भी नहीं दे पाई सपा सरकार
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दावा किया था उनकी सरकार आगरा की पेयजल समस्या का समाधान कर देगी। वर्षों से धीमी गति से चल रही गंगाजल योजना को तेज किया जाएगा। पहले 2016 तक कार्य पूर्ण करने का दावा किया था, जो बढ़कर 2017 जनवरी हो गया। उसके बाद मार्च और अब जल निगम के अफसर कह रहे हैं जून 2017 में काम पूरा होगा, लेकिन जिस गति से काम चल रहा है उसे देखकर नहीं लगता है कि अगले छह महीने में भी शहर को गंगाजल मिल पाएगा।
साफ्टवेयर पार्क भी बना सपना
आगरा में आईटी पार्क स्थापित करने की योजना राजनाथ सिंह सरकार के समय से चल रही है लेकिन अखिलेश यादव की सरकार जाने तक यहां आईटी पार्क को छोड़िए साफ्टवेयर पार्क तक नहीं बन पाया है। बसपा सरकार में पांच एकड़ के साफ्टवेयर पार्क की योजना पर काम हुआ था लेकिन आईटी कंपनियों ने रुचि नहीं दिखाई। सपा सरकार में यह घटकर दो एकड़ तक सिमट गया लेकिन साफ्टवेयर पार्क की नींव में एक ईंट तक नहीं लग पाई।