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घट गया गंगा का जलस्तर, लेकिन बरकरार हैं दुश्वारियां

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कासगंज पटियाली क्षेत्र में खेतों में भरा गंगा की बाढ़ का पानी - फोटो : KASGANJ
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कासगंज। बैराजों से छोड़े गए पानी का दबाव भले ही कम हो गया है, लेकिन कटान का खतरा बढ़ गया है। जलस्तर में कमी आ गई है, लेकिन खेतों में पानी जमा है, जिससे फसलें बर्बादी के कगार पर हैं। सिंचाई और राजस्व विभाग के अफसर निगरानी में जुट गए हैं।
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पहाड़ों पर पिछले दिनों हुई बारिश के बाद बैराजों पर निरंतर पानी का दबाव बना रहा। मुजफ्फरनगर और दतलाना बांध कट गए। उसके बाद तो और भी परेशानी बढ़ीं। बांधों की मरम्मत तो सिंचाई विभाग ने कर दी, लेकिन बांधों के कटने से जो पानी फसलों को जलमग्न करते हुए आबादी तक पहुंचा वह जमा हो गया है। जलस्तर कम हो जाने के बाद कुछ हद तक पानी सिमटा तो है, लेकिन पूरी तरह आबादी और फसलों से बाहर नहीं निकला है।
रविवार को सहवाजपुर, मुजफ्फरनगर, दतलाना, अजीतनगर, किसौल, किलौनी, बमनपुरा, मेहोला सहित कई गांव के समीप फसलों में भरा पानी जमा है। इससे सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न हैं। किसान अब मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इधर पानी घटने से कटान का खतरा बढ़ रहा है तो टीमें निगरानी में जुटी हैं।
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जलस्तर में तेजी के साथ गिरावट आ रही है। अभी और पानी कम होगा। लो फ्लड है। बाढ़ का खतरा पूरी तरह से टल जाएगा। अरुण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई
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