आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान संस्थान (केएमआई) के भाषा विज्ञान विभाग के शिक्षक ने 'अग्रेसन रिकग्निशन टूल' नाम से सॉफ्टवेयर बनाया है। यह फेसबुक पर अमर्यादित टिप्पणियों को पहचान कर अलग कर देगा। ये टिप्पणियां एक निश्चित बाक्स में जाएंगी। यूजर को संबंधित बाक्स में ही जाने पर दिखेंगी।
भाषा विज्ञान विभाग में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर रितेश कुमार ने बताया कि ऑफ्टवेयर वीडियो में इस्तेमाल उग्र शब्दों और टेक्स्ट में लिखे गए अमर्यादित वाक्यों को पहचानकर अलग करता है। ऑफ्टवेयर को बनाने में माइक्रोसाफ्ट रिसर्च ने फंडिंग की है। उन्होंने बताया कि कई बार फेसबुक यूजर अपनी टाइम लाइन पर कोई पोस्ट डालते हैं, तो चंद मिनट में कई सारे मैसेज आ जाते हैं।
सभी पढ़ पाना यूजर के लिए संभव नहीं होता है। कुछ मैसेज अमर्यादित भी होते हैं। सॉफ्टवेयर इन्हें अलग कर देगा। संबंधित बॉक्स में जाकर यूजर मैसेज को डिलीट कर देगा तो वो किसी और को नहीं दिखेंगी। कई भड़काऊ वीडियो भी फेसबुक पर डाले जाते हैं। सॉफ्टवेयर बोलने के अंदाज को पकड़ता है।
20 हजार टिप्पणियां डाली गई हैं
रितेश कुमार ने बताया कि सॉफ्टवेयर मशीन लर्निंग पर आधारित है। जो कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तरह काम करता है। फेसबुक से 20 हजार टिप्पणियां (अमर्यादित) लेकर इसमें डाली गई हैं। ये टिप्पणियां जैसे ही डाली जाएंगी, सॉफ्टवेयर उन्हें अलग कर देगा। सॉफ्टवेयर अभी 80 फीसदी सफल है। कई वाक्यों को नहीं पकड़ पा रहा है।