मथुरा में श्री कृष्ण जन्म भूमि -शाही ईदगाह का केस अदालत में राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है। एक केस के वादी एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह व राजेद्र माहेश्वरी ने अदालत में बुधवार को एक प्रार्थना पत्र दिया। इसमें कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि मुस्लिम तुष्टीकरण के तहत कांग्रेस ने श्री कृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ जमीन को लेकर वर्ष 1968 में शाही ईदगाह पक्ष से राजीनामा किया था। इस राजीनामा का श्री कृष्ण जन्म भूमि सेवा संघ को कोई अधिकार ही नहीं था। श्री कृष्ण जन्म स्थान का मुख्य श्री कृष्ण जन्म भूमि ट्रस्ट था। इस राजीनामा में ट्रस्ट कहीं शामिल ही नहीं था।
आरोप लगाए कि श्री कृष्ण जन्मभूमि सेवा संघ के अध्यक्ष बिहार के राज्यपाल और लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष एम ए अयंगर व अन्य सदस्यों में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारिका प्रसाद मिश्र व लोकसभा सांसद गजाधर सोमानी शामिल थे। जबकि शाही ईदगाह पक्ष में 34 प्रतिवादी भी कांग्रेस में उच्च पदस्थ थे। इस प्रकार से वर्ष 1968 में राजनीतिक षड्यंत्र के तहत यह राजीनामा कराया गया। बाद में 1973 में इसे षड्यंत्रपूर्वक डिक्री करा लिया। वादी ने अदालत से यह डिक्री शून्य करने की मांग की है। इसके लिए उनकी ओर से 5 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिया गया एक निर्णय भी रखा गया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी भी देवोत्तर संपत्ति या विग्रह की संपत्ति को किसी भी व्यक्ति या संस्था को न तो विक्रय किया जा सकता है और ना ही लीज पर दिया जा सकता है। अधिवक्ता ने राजीनामा निरस्त करने की मांग की है। एडवोकेट राजेंद्र माहेश्वरी ने बताया कि 30 सितंबर को अग्रिम तारीख है।