कासगंज। कभी दस्यु और सरगनाओं की दहशतगर्दी के चलते शिक्षा से कोसों दूर रही कटरी और पिछड़े इलाकों में साक्षरता की रोशनी फैल गई है। यहां पुरुष ही नहीं बल्कि आधी आबादी में भी साक्षर हो गई है। साक्षरता के लिए जागरूकता की मिसाल भी आधी आबादी ने ही पेश की है। घर-घर पहुंच कर गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देना, अज्ञानता के अंधेरे से बाहर निकालना, संपन्न लोगों को स्कूलों के लिए प्रेरित करना। यह सब कर दिखाया है सरला और मीनू ने। सरला 30 साल से अपने इसी लक्ष्य पर कायम हैं। जबकि मीनू पिछले 3 साल से महिलाओं को साक्षर करने में जुटी हैं।
70 वर्षीय सरला शर्मा शिक्षा के क्षेत्र में पिछले 30 सालों से कटरी क्षेत्र में साक्षरता की अलख जगा रही हैं। मूल रूप से एटा के राजा के रामपुर की रहने वाली सरला शर्मा के परिवार में जब आर्थिक समस्या हुई तो उन्होंने जिले के कस्बा भरगैन में एक प्राइवेट संस्थान में 500 रुपये प्रतिमाह पर नौकरी की। यहां उन्होंने देखा कि तमाम बच्चे ऐसे हैं जो पढ़ने में होशियार हैं और उन्हें बेहतर शिक्षा मिल जाए तो वे निश्चित ही ऊंचाइयों तक पहुंच जाएंगे। वो कहती हैं कि एक लक्ष्य तय किया कि विद्यालय के बाद घर-घर जाएंगे और विद्यार्थियों के अभिभावकों को जागरूक करेंगे। इसके अलावा गरीब बच्चों को नि:शुल्क ट्यूशन पढ़ाएंगे। तभी से बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रही हैं। सरला शर्मा पिछले दस सालों से भरगैन में ही रहकर शिक्षा की अलख जगा रही हैं। उनके पढ़ाए हुए अधिकांश बच्चे शिक्षा विभाग में शिक्षक हैं।
मूल रूप से आगरा की रहने वाली मीनू शाक्य वर्ष 2015 में बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापिका बनीं। वे सिढ़पुरा के प्राथमिक विद्यालय ताजपुर पर तैनात हैं। विद्यालय में जब भी अभिभावक बैठक बुलाई जाती थी तब तमाम महिलाएं आती थीं। उनमें अधिकांश महिलाएं हस्ताक्षर न कर अंगूठा लगाती थीं। यह देख मन ही मन कुछ नया करने की कोशिश करने लगीं और तीन साल पहले उन्होंने अपना उद्देश्य तय कर लिया। उन्होंने लक्ष्य बनाया घर-घर पहुंच महिलाओं को शिक्षित करने का। मीनू कहती हैं कि जब मां शिक्षित होगी तो निश्चित ही बच्चे भी शिक्षित होंगे। अब तक वे कई महिलाओं को हस्ताक्षर करना सीखा चुकी हैं और इन दिनों स्कूल समय के बाद घर-घर जाकर 15 महिलाओं को शिक्षित कर रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े सिढ़पुरा इलाके में मीनू की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में नया इतिहास रच रही है।
शिक्षिका मीनू शाक्य- फोटो : KASGANJ