सीखने के लिए उत्तर भारत के छात्र बनाए साथी : अशोक वेंकट
एसपी आरए अशोक वेंकट के.ने बताया कि वो आंध्र प्रदेश के तिरुपति के निवासी हैं। वर्ष 2017 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। प्रदेश में मुख्य भाषा के रूप में तेलगू है, जबकि पहली से लेकर दसवीं कक्षा तक दूसरी भाषा के रूप में हिंदी पढ़ाई जाती है। स्कूलों में हिंदी व्याकरण सिखाई जाती है। इससे लिखना तो सीख सकते थे लेकिन बोलना नहीं आ पाता। उनके हिंदी में 90 प्रतिशत तक अंक आते थे।
एग्रीकल्चर में बीएससी करने के लिए जिस कॉलेज में प्रवेश लिया, उसमें उत्तर भारत के छात्रों की संख्या अधिक थी। हिंदी बोलना सीखने के लिए उनसे दोस्ती की। पुणे में एमबीए के दौरान भी ऐसा किया। अब हिंदी बोलने और लिखने में किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है। वह प्रशिक्षण के बाद से ही मीडिया को जानकारी खुद ही देने लगे हैं।
लोगों को आपस में जोड़ने वाली भाषा है हिंदी: ए मनिकन्डन
तमिलनाडु जैसे गैर हिंदी भाषी राज्य से आने वाले 2017 बैच के आईएएस अधिकारी ए मनिकन्डन आगरा में मुख्य विकास अधिकारी हैं। तमिल उनकी क्षेत्रीय भाषा है, परंतु अब वह हिंदी में रच-बस गए हैं। उन्होंने बताया कि मैं मलयालम को समझता हूं। तेलगू, अंग्रेजी और हिंदी बोलता हूं। हिंदी लोगों को आपस में जोड़ने वाली भाषा है।
उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को हिंदी जरूर समझनी चाहिए। साहित्य का जो भंडार हिंदी में है वह अन्य भाषाओं में अधिक नहीं। समय और संस्कृति से भाषा में बदलाव आया है। जो हिंदी दो हजार साल पहले बोली जाती थी अब वह परिष्कृत हो गई है। उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मुझे हिंदी की सेवा करने का अवसर मिला।