आगरा में थाना न्यू आगरा पुलिस ने एक साइबर ठग को गिरफ्तार किया है। उसके पिता ऑटो चलाते हैं। भाई की परचून की दुकान है और वह खुद बीटेक पास है। दिल्ली में अच्छी नौकरी नहीं मिली तो साइबर ठगी करने लगा। मदद के बहाने लोगों के डेबिट कार्ड बदलकर खाते खाली कर देता था। एक साल में एक करोड़ से अधिक रुपये निकाल चुका है। उसके एक खाते में ही पुलिस को नौ लाख रुपये मिले हैं।
डीसीपी सिटी सूरज राय ने बताया कि आरोपी पृथ्वीनाथ फाटक स्थित अशोक विहार निवासी अलीशेर है। उससे एचडीएफसी बैंक के तीन डेबिट कार्ड, दो पैनकार्ड, एक आधार कार्ड, एक मोबाइल और 70 हजार रुपये बरामद किए गए। पूछताछ में पता चला कि वह बीटेक पास करने के बाद दिल्ली में निजी कंपनी में नौकरी करने गया था। इंजीनियर तो बना लेकिन अच्छी नौकरी नहीं मिली।
इस पर नौकरी छोड़कर भरतपुर में अपने मामा के घर रहने लगा। ममेरे भाई साइबर ठगी करते हैं। वह नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों से रकम अपने खातों में डलवाते हैं। अलीशेर भी ममेरे भाइयों के लिए काम करने लगा। फर्जी कागजात पर खुलवाए गए खातों के डेबिट कार्ड ले लेता था। इसके बाद खाते में रकम आने पर निकालता था। इसके लिए कमीशन लेता था। बाद में वह खुद भी ठग बन गया।
थानाध्यक्ष न्यू आगरा राजीव कुमार ने बताया कि अलीशेर उस्मानी ममेरे भाइयों की रकम निकालने के दौरान खुद भी ऐसे एटीएम में जाता था, जहां पर गार्ड नहीं होता है। महिला और बुजुर्ग के एटीएम में आने पर केबिन में घुस जाता है। उनसे मदद की कहता है। इसके बाद पिन देख लेता है। जैसे ही लोग कार्ड लगाते हैं, उसे बहाने से बदलकर उसी बैंक का दूसरा डेबिट कार्ड पकड़ा देता है।
5 नवंबर को ही उसने मऊ रोड, खंडारी पर एचडीएफसी बैंक के एटीएम में वारदात की थी। कार्ड बदलकर खाते से रकम निकाल ली थी। इसका केस भी दर्ज किया गया। उसके तीन खाते हैं। इनमें केनरा बैंक एप के माध्यम से खाता चेक किया गया। नौ लाख रुपये जमा थे। उसे फ्रीज करा दिया गया है। अन्य खातों की जानकारी जुटाई जा रही है। वह एक साल में एक करोड़ से अधिक रुपये लोगों के खाते से निकाल चुका है।