प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि अभी तक एसएन में लेजर प्रॉक्टोलॉजी सर्जरी की सुविधा नहीं थी। मरीजों की ओपन सर्जरी से ही इलाज किया जाता था। अब लेजर प्रॉक्टोलॉजी सर्जरी की सुविध शुरू हो गई है। मथुरा के 42 साल की महिला की पहली सर्जरी की गई है। एसएन प्रदेश का पहला कॉलेज बन गया है, जहां लेजर विधि की सुविधा मिल रही है। ये एसएन में निशुल्क है और निजी अस्पताल में 80 हजार से एक लाख रुपये तक का खर्चा आता है। सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि पाइल्स, फिस्टुला, फिशर और पाइलोनाइडल साइनस के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इस विधि से अब मरीजों को दर्दरहित सर्जरी की सुविधा मिल सकेगी।
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लेजर से घाव और खराब टिश्यू को करते हैं नष्ट
एसएन के सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. करन रावत ने बताया कि ओपन सर्जरी में चार सेमी तक घाव कर ऑपरेशन करते हैं। इसमें 200 एमएल तक खून बहता है। मरीज काे ठीक होने में काफी समय लगता है। लेजर विधि से चार एमएम के जरिये किरणें घाव की गहराई तक पहुंचाते हैं। इससे संक्रमण और खराब टिश्यू को नष्ट करते हैं। 24 घंटे में ही मरीज दैनिक कार्य करने लगता है। इस विधि से दर्द और घाव कम होता है। संक्रमण का खतरा नहीं। ड्रेसिंग भी आसान है। आईसीएमआर ने इस विधि से ऑपरेशन करने के बाद इसके सफलता दर के लिए शोध की भी अनुमति दी है। सर्जरी में डॉ. अनुभव गोयल, डॉ. ईशान, डॉ. रोहन, डॉ. अर्पिता का सहयोग रहा।
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