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विश्वविद्यालय से जारी फर्जी अंकपत्र से मध्यप्रदेश में पटवारी बने 12 लोग, अब गिरफ्तारी पर इनाम

Sun, 20 Jan 2019 12:54 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
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आगरा के डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के फर्जी अंकपत्र से मध्य प्रदेश में पटवारी की नौकरी हासिल करने वाले 12 आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। सभी आरोपी मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के रहने वाले हैं। 
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आरोपियों में रामसिंह रघुवंशी, परमाल सिंह रघुवंशी, भूपेंद्र सिंह रघुवंशी, देवेंद्र सिंह रघुवंशी, सत्येंद्र सिंह रघुवंशी, शिवकुमार रघुवंशी, विनोद सोनी, शशी काले, अभिलाषा, रामकुमार यादव, श्वेता श्रीवास्तव और अनिल यादव शामिल हैं।
 
एसआईटी ने आरोपियों के खिलाफ अदालत से कुर्की आदेश लेने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस से इनके खिलाफ कार्रवाई का आग्रह किया था। कुर्की के बाद इन्हें भगोड़ा भी घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद इनके खिलाफ कोई कार्रवाई न होने पर जांच एजेंसी ने इन सभी पर इनाम घोषित करवाया है। एसआईटी अब इनकी गिरफ्तारी के लिए मध्य प्रदेश जाएगी।
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पहले भी सुर्खियों में रहा विश्वविद्यालय

आगरा के डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में फर्जी अंकपत्र मामले में 2004 के बाद तकरीबन हर वर्ष कोई न कोई खुलासा सामने आता रहा है। सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा बीएड में किया गया। यह फर्जीवाड़ा बागपत से खुला। बागपत के डायट में फर्जी अंकपत्र के जरिए तमाम लोगों के शिक्षकों की नौकरी हासिल कर लेने की जानकारी सामने आई थी। 

वर्ष 2012 में मामला खुलने के बाद इसे सीबीसीआईडी को सौंपा गया, जिसने दो साल तक जांच की, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर हुए फर्जीवाड़े में वह कुछ खास नहीं कर सकी। इस दौरान हाईकोर्ट में दायर एक याचिका पर अदालत ने संज्ञान लिया। इसके बाद राज्य सरकार ने फर्जीवाड़े की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया।

हजारों ने फर्जी अंकपत्र से पाई सहायक अध्यापक की नौकरी

एसआईटी ने वर्ष 2005 से 2009 तक की जालसाजी की जांच में पाया था कि डॉ बीआर आंबेडकर विवि के अधिकारियों से मिलीभगत कर 83 निजी कॉलेजों ने बीएड के 25 हजार जाली अंकपत्र बेचकर उनका रिकॉर्ड गोपनीय चार्ट में दर्ज करा दिया था। जाली अंकपत्र से लगभग साढ़े चार हजार सहायक अध्यापकों के नियुक्त होने की जानकारी सामने आ चुकी है।
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