ज्योतिषाचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक
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*ॐ नमो भगवते वासुदेवाय व ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रनतह क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः। इस महामंत्र का जप करने से चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।
अर्धरात्रि में कृष्ण जन्मोत्सव का विधान
सविधि बाल कृष्ण की पूजा अर्चना, श्रृंगार, प्रसाद (माखन मिश्री व पंजेरी,कदली फल) आरती, पुष्पांजलि के साथ पूजा समर्पित की जाती है। पूजा के साथ शंख से चन्द्रमा और श्रीकृष्ण के लिए अर्घ्य दान का विशेष महत्व बताया है। मथुरा-वृंदावन में कृष्ण जन्मोत्सव वैदिक विधि से मनाया जाता है जो दर्शनीय भी है। वैसे पूरे भारत वर्ष में जन्माष्टमी पर्व पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है।यह सर्वमान्य उत्सव है। वल्लभ, चैतन्य व निम्बार्क संप्रदाय का यह सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: मथुरा में आस्था का सैलाब, द्वारिकाधीश मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़, तस्वीरें