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बाकी है निशां: बदहाल शहीद स्मारक, आज होते तो बहुत दु:खी होते मातृभूमि के सेवक ठाकुर राम सिंह

Tue, 24 Aug 2021 01:39 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

संजय प्लेस में स्थापित शहीद स्मारक के पीछे उनका बहुत बड़ा योगदान है। उनके प्रस्ताव पर ही प्रशासन ने इस स्मारक को मूर्त रूप दिया था। हालांकि आज अगर ठाकुर साहब जिंदा होते तो वे स्मारक के हालात देख कर बहुत व्यथित होते।
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शहीद स्मारक आगरा का हाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले ठाकुर राम सिंह आज अगर जिंदा होते तो बहुत दु:खी होते। जीवनभर अविवाहित रहकर मातृभूमि की सेवा करने वाले ठाकुर साहब ने अथक प्रयासों के बाद शहीद स्मारक की नींव रखवाई थी। आज यह स्मारक दुर्दिन झेल रहा है। शहीदों की मूर्तियां बुरे हाल में हैं। दीवारें दरक रही हैं।

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शहीद ए आजम भगत सिंह के साथी और काला पानी की सजा काट कर आने वाले ठाकुर राम सिंह कहते थे कि अंग्रेजों को तो हमने भगा दिया लेकिन अब अपने ही देश बर्बाद करने पर तुले हैं। 98 बरस की उम्र में उनका देहात ताजनगरी के राजामंडी इलाके में ही हुआ। शहीदों के यादें संजोने के लिए ठाकुर राम सिंह ने बहुत कुछ किया। संजय प्लेस में स्थापित शहीद स्मारक के पीछे उनका बहुत बड़ा योगदान है। उनके प्रस्ताव पर ही प्रशासन ने इस स्मारक को मूर्त रूप दिया था। हालांकि आज अगर ठाकुर साहब जिंदा होते तो वे स्मारक के हालात देख कर बहुत व्यथित होते।
स्मारक बहुत ही बुरे हाल से गुजर रहा है। निर्माण के कुछ वर्षों तक तो व्यवस्थाएं दुरुस्त रहीं लेकिन अब हालात बहुत ही खराब हैं। परिसर में लगी मूर्तियां चटखने लगी हैं। एक मूर्ति तो जमीन पर गिर पड़ी थी। मूर्तियों पर पक्षी बैठ कर उन्हें गंदा न करें, इसके लिए शेड लगाई गई थी, वो भी टूट रही है। स्मारक समिति ने कई बार स्थानीय प्रशासन से व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की मांग की है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्मारक के मंच के पीछे पूरा जंगल उग आया है।

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मातृभूमि के सेवक ठाकुर राम सिंह - फोटो : अमर उजाला
फव्वारों की हालत भी खस्ता
स्मारक में बेतरतीब तरीके से बिजली के तार फैले पड़े हैं। यहां बनाए गए फव्वारों की हालत खराब है। बरसों से इनका संचालन नहीं हुआ है।स्मारक में लोगों की आमद भी कम हो गई है। पहले शाम को काफी लोग यहां आते थे, अब गिने-चुने ही रह गए हैं। असामाजिक तत्वों का यहां जमघट लगा रहता है। शहीद स्मारक तमाम सामाजिक व साहित्यिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। कई बड़े धरने और प्रदर्शन भी होते रहे हैं। विशेष मौकों पर यहां तमाम कार्यक्रम होते हैं।

स्मारकों का रखें ख्याल
शहीदों की याद में बनाए गए स्मारकों का ध्यान रखना चाहिए। शहीदों को ऐसे अपमानित न किया जाए। ठाकुर साहब की तमाम यादें जहन में घूमती रहती हैं। स्मारक का जीर्णोद्धार होना चाहिए। -शशि शिरोमणी, क्रांतिकारियों के परिजन

शहीद स्मारक: भगत सिंह के सहयोगी ने कराया था निर्माण, आज बुरे हाल में स्मारक, टूट रहीं मूर्तियां, दरक रहीं दीवारें
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