आगरा में माध्यमिक शिक्षा विभाग में हाजिरी नहीं अधिकारियों की मेहरबानी से वेतन जारी होना भारी पड़ा है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से अटैचमेंट समाप्त होने के बाद भी कई शिक्षक और कर्मचारी विद्यालय नहीं जाते हैं। किसी न किसी तरीके से कार्यालय से जुड़े रहते हैं। शिक्षक अजय पाल का मामला सामने आने के बाद विभाग ऐसे शिक्षकों और कर्मचारियों की सूची तैयार करने में लग गया है।
संयुक्त शिक्षा निदेशक आरपी शर्मा के खिलाफ शिकायत करने वाले शिक्षक अजय पाल सिंह के वेतन को लेकर यह गड़बड़ी की गई है। उनकी तैनाती डीसी वैदिक इंटर कॉलेज में बताई जाती रही लेकिन विद्यालय से वेतन सूची में उनका नाम कटकर आता रहा। इसके बाद भी पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक दिनेश कुमार की मेहरबानी से वेतन मिलता रहा।
अब मामला शासन तक पहुंचा, तो विभाग के अधिकारी और कुछ कर्मचारी फंसते नजर आए। वेतन जारी करने को लेकर सवाल किए गए, तो कोई जवाब शासन को नहीं दिया जा सका था। इसी वजह से अजय पाल के वेतन पर रोक लगा दी गई।
शिक्षक लंबे समय से विद्यालय में कक्षा लेने नहीं गया है और डीआईओएस कार्यालय से जुड़े कार्य करता रहा। ऐसे अन्य शिक्षक और कर्मचारी भी हैं, जो विद्यालय में बिना हाजिरी के वेतन प्राप्त कर लेते हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर 6 कर्मचारियों को डीआईओएस ने कार्यालय से हटाया था, जिसमें से दो कर्मचारी अभी भी संबंधित विद्यालय नहीं जा रहे।
प्रभारी डीआईओएस डॉ. मानवेंद्र सिंह ने बताया कि कई मामलों में शिक्षक न्यायालय का आदेश ले आते हैं, जिसके कारण वेतन जारी करना पड़ता है। किसी भी शिक्षक या कर्मचारी का हाजिरी रिकार्ड होना जरूरी है, इसी को लेकर जांच कराई जा रही है।