आगरा। गुरुद्वारा मिठ्ठा खूह महर्षिपुरम में 400वें बंदी छोड़ दिवस में कीर्तन सुनकर संगत धन्य हो गई। जो बोले सो निहाल के जयकारे लगाते हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के आगे मत्था टेका।
कीर्तनकार भाई हरजोत सिंह ने गुरु का शबद वजे जी नाले... और रतन गुरु का शबद है बूझे बुझन हार...सुनाकर संगत गुरु की महिमा का वर्णन किया। स्त्री सत्संग सभा की ओर से बच्चों ने गुरुवाणी का गायन किया। अरदास हुकुमनामा लेकर संत अटूट लंगर छका। मुख्य सेवादार हरजोत सिंह, प्रभजोत सिंह, जसवीर सिंह, कंवलजीत सिंह चड्डा, हरप्रीत सिंह, प्रथम सिंह, श्याम भोजवानी रहे। इसके अलावा गुरुद्वारा मधुनगर में भाई मेजर सिंह ने कीर्तन सुनाकर संगत को निहाल किया। सुखमनी सेवा सभा के वीर महेंद्र पाल सिंह ने गुरवाणी का गायन किया। प्रधान नरेंद्र सिंह लालिया, अरजिंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, धर्मवीर सिंह रहे।