कासंगज में राष्ट्रीय कवि रामधारी सिंह दिन की जयंती पर निर्झर की वर्चुअल काव्य गोष्ठी में शामिल क
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कासगंज। निर्झर साहित्यिक संस्था ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती मनाई। उनकी जयंती पर उन्हें नमन किया और वर्चुअल काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. अखिलेश चंद्र गौड ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर सरस्वती वंदना की। उन्होंने दिनकर को समर्पित गीत पढ़ा थी एक धधकती चिंगारी, दिनकर सा सिंह रामधारी।
मुख्य अतिथि इंजीनियर राजेश मौर्य ने अपने कहा कि उर्वशी, रश्मिरथी, हुंकार, कुरुक्षेत्र, तथा परशुराम की प्रतीक्षा आदि ऐसी कृतियां हैं, जो आज भी युवाओं को विशेष रूप से प्रोत्साहित करती हैं। विशिष्ट अतिथि इंजीनियर अवधेश सक्सेना ने काव्य पाठ किया कि रामधारी लिख गए जो, कौन कब लिखता कहां। जबलपुर से जुड़ीं मिथलेश बड़गैंया ने अपनी रचना प्रस्तुत की सूरज जैसा पुंज, दिनकर जैसा काम । संयोजक एवं संचालक अखिलेश सक्सेना ने पढा़ कि जो रश्मिरथी का है सर्जक, उर्वशी महाकाव्य प्रणेता भी। अलीगढ़ की पूनम शर्मा ने पढ़ा मूल सभ्यता संस्कृति भूले, अरु भूले परिवेश, भूल गए दिनकर के संदेश।
नोएडा की सपना सक्सेना दत्ता ने पढा कि दिनकर के समान ओजमयी वाणी सान, रामधारी रथ तान, कृष्ण को बुलाते हैं। पारुल बंसल ने दिनकर की कविता जीवन के दिन चार, अवधि उससे भी अल्प जवानी की प्रस्तुति दी। सोरों के मनोज मधुवन, हास्य कवि निर्मल सक्सेना, डीपी शर्मा भ्रमर सहित कवियों ने भी काव्य पाठकर दिनकर को नमन किया।