नौवें आम चुनाव से पहले लोकप्रिय धारावाहिक रामायण और महाभारत के दूरदर्शन पर प्रसारण का मामला गरमा गया था। कुछ लोगों ने देश की धर्मनिरपेक्ष नीति के खिलाफ बताते हुए इस तरह के धारावाहिकों के प्रसारण का विरोध किया। इसके बाद सरकार को सफाई देनी पड़ी। तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री कमलाकांत तिवारी ने संसद में कहा था कि ये प्राचीन ग्रंथ देश की मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक हैं। इनका प्रसारण धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के विरुद्ध नहीं है।
अमर उजाला के 5 मई, 1989 के अंक में प्रकाशित समाचार के अनुसार, खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाले एक वर्ग ने रामायण और महाभारत के दूरदर्शन पर प्रसारण को लेकर सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने इस तरह के धारावाहिकों के प्रसारण को रोकने की मांग की। मामले ने इतना तूल पकड़ लिया कि उस समय कांग्रेस सरकार में राज्य मंत्री कमलाकांत तिवारी को संसद में सफाई देनी पड़ी ।
उन्होंने इस तरह के सीरियल प्रसारण को धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के विरुद्ध बताने वालों को आड़े हाथों लिया। कहा कि प्राचीन ग्रंथ देश की मिली जुली संस्कृति के परिचायक हैं। ये धर्मनिरपेक्षता की नीति के विरुद्ध नहीं हैं। सरकार भारतीय संस्कृति के प्रतीक धारावाहिकों का प्रसारण जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि सरकार आकाशवाणी और दूरदर्शन पर लोक रुचि के कार्यक्रमों का प्रसारण बंद नहीं करेगी। इसके कुछ महीने बाद नवंबर में हुए नौवीं लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार ने जनादेश खो दिया।
रामायण धारावाहिक ने बनाया विश्व रिकॉर्ड
रामानंद सागर के बनाए इस धारावाहिक ने अपने समय में लोकप्रियता का नया कीर्तिमान स्थापित किया। इसकी लोकप्रियता को रामायण फीवर का नाम भी दिया गया। इसके प्रसारण के दौरान सड़कें सुनसान हो जाती थीं। वाहनों से चल रहे लोग रुककर सीरियल देखते थे। अपने प्रसारण के दौरान यह विश्व में टेलीविजन पर देखे जाने वाला सबसे बड़ा कार्यक्रम बन गया था। इसके 10 करोड़ दर्शक थे।