गूगल तक नहीं बता पाया किन तत्वों से बनाईं नकली दवाएं
राजौरा बंधु नकली दवाओं के जो रैपर तैयार कराते थे, उन पर साल्ट के नाम अपनी मर्जी से कुछ भी लिखवा लेते थे। औषधि विभाग ने नकली दवाओं की सूची तैयार की तो इसका पता चला। आठ नकली दवाएं ऐसी थीं जिनके तत्व (सॉल्ट) की औषधि निरीक्षकों को भी जानकारी नहीं थी। मालूम करने के लिए पहले किताबें देखी गई, इनमें भी नहीं मिले तो गूगल पर खोजा गया लेकिन यहां भी इन नाम के सॉल्ट नहीं मिले।
औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने बताया कि राजौरा बंधुओं की कंपनी लाइफ रेमेडीज को गूगल और आठ दवाओं के अलग-अलग तत्वों को खोजा गया तो कोई जानकारी नहीं मिली है। इससे लगता है कि दवाओं के पत्ते पर फर्जी तत्व अंकित किए हैं। इसके यहां से मिलीं मस्तिष्क रोग, पेट रोग, स्त्री रोग, मानसिक रोग, एंटीबॉडीज और दर्द निवारक दवाओं के नमूनों की जांच कराई जा रही है। नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद इसके खिलाफ धाराएं और बढ़ा दी जाएंगी।
मोनोपॉली कंपनियों से खरीदते थे एक्सपायर दवाएं
आगरा। राजौरा बंधु एकाधिकार (मोनोपॉली) कंपनियों के यहां से एक्सपायर हो चुकी दवाओं की खरीद कर इनको दोबारा पैक कर बाजार में सप्लाई करता था। खुद की कंपनी की एक्सपायर दवाओं को भी ऐसे ही ठिकाने लगा रहा था।
औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने बताया कि मोनोपॉली कंपनी की एक्सपायर दवाओं को एकत्रित कर इनको दोबारा पैक करता था। इसके लिए यह मथुरा, गाजियाबाद से इनकी खरीद की जानकारी मिली है। इसकी पूरी जानकारी नहीं बता रहा है। यह कहां-कहां से इनकी खरीद कर रहा था, इसकी जांच की जा रही है।
खुद की कंपनी की एक्सपायर हो चुकी दवाओं को यह दोबारा पैक नहीं करता था, उसके लिए यह रैपर से रसायन का उपयोग कर एक्सपायर तिथि को मिटाकर डाई के जरिये नई तारीख अंकित कर देता था। डाई समेत अन्य सामान इसके यहां से जब्त भी हुआ है। रैपर की छपाई मथुरा में ही कराने की जानकारी मिली है, एक प्रिंटिंग मशीन का सुराग मिला है, इसके खिलाफ अभी और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।