टारगेट किलिंग की घटनाओं के बाद कार्रवाई
जम्मू कश्मीर की विभिन्न जेलों में बंद कुख्यात पत्थरबाज, ओवर ग्राउंड वर्कर और आतंकियों के मददगारों को अब प्रदेश के बाहर की जेलों में शिफ्ट किया जा रहा है। जिससे घाटी की शांति में खलल डालने वाले पाकिस्तानी हैंडलरों के नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके। यह कार्रवाई हाल की टारगेट किलिंग की घटनाओं के मद्देनजर की गई हैं।
सुरक्षित जेलों में से एक आगरा की केंद्रीय जेल
आगरा की जेल में जम्मू कश्मीर के बंदी ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अन्य जेलों में बंद बदमाश और आरोपियों को भेजा जाता है। इसकी पीछे सुरक्षा एक प्रमुख कारण है। यह जेल वर्ष 1982 में बनी थी। अब जेल में 1700 से अधिक सजायाफ्ता बंदी निरद्ध हैं।
जेल में विशेष सुरक्षा बैरक भी है। इस बैरक में बंदी अलग-अलग रह सकते हैं। कुख्यातों और विशेष बंदियों को इस बैरक में रखा जाता है। जेल की मुख्य दीवार के बाद एक और दीवार बनाई गई है। बैरियर पर पुलिस तैनात रहती है। एक प्लाटून पीएसी हर समय रहती है।
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