जेल के वरिष्ठ अधीक्षक वीके सिंह ने बताया कि कुल 38 बंदी आगरा लाए गए हैं। इनमें 27 कश्मीर से, जबकि 11 जम्मू के हैं। इन बंदियों को आम सजायाफ्ता बंदियों से अलग दो बैरक में रखा गया है। उनका एंटीजन टेस्ट भी कराया जाएगा।
17 अक्तूबर को 15 बंदी शिफ्ट किए गए थे
इससे पहले ही 17 अक्तूबर को 15 बंदी आ चुके हैं। वह भी अलग बैरक में रखे गए हैं। पूर्व में तीन कश्मीरी रह रहे थे, जिनमें से दो पाक अधिकृत कश्मीर के हैं। इस तरह से जेल में बंदियों की संख्या 56 हो गई है। एसपी सिटी विकास कुमार ने बताया कि जेल में बंदियों को दाखिल करने के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
जम्म कश्मीर के बंदियों को जिन चार पुलिस वाहनों से लाया गया, उनकी खिड़कियां चादर से ढकी हुईं थीं। आगरा पुलिस के साथ जम्मू कश्मीर पुलिस के जवान भी बैठे थे। आगे पीछे एस्कॉर्ट करती पुलिस की दो-दो गाड़ियां चल रही थीं।
खेरिया एयरपोर्ट से लेकर केंद्रीय कारागार तक रास्ता क्लीयर कराया गया। जम्मू कश्मीर से बंदियों को लाने पर कुछ यही सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। खुद एसपी सिटी विकास कुमार नेतृत्व कर रहे थे। 50 से अधिक पुलिसकर्मी लगे थे। जेल के बाहर भी पीएसी की संख्या बढ़ाई गई थी।
सितंबर 2019 में भी भेजे गए थे बंदी
सितंबर 2019 में भी जम्मू कश्मीर से बंदियों को आगरा भेजा गया था। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद वहां सक्रिय अलगाववादी लोगों को तत्कालीन सरकार ने गिरफ्तार किया था। 80 से अधिक बंदियों को भेजा गया था। इन सभी बंदियों को लोक सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। तब भी सुरक्षा कड़ी की गई थी।
टारगेट किलिंग की घटनाओं के बाद कार्रवाई
जम्मू कश्मीर की विभिन्न जेलों में बंद कुख्यात पत्थरबाज, ओवर ग्राउंड वर्कर और आतंकियों के मददगारों को अब प्रदेश के बाहर की जेलों में शिफ्ट किया जा रहा है। जिससे घाटी की शांति में खलल डालने वाले पाकिस्तानी हैंडलरों के नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके। यह कार्रवाई हाल की टारगेट किलिंग की घटनाओं के मद्देनजर की गई हैं।
सुरक्षित जेलों में से एक आगरा की केंद्रीय जेल
आगरा की जेल में जम्मू कश्मीर के बंदी ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अन्य जेलों में बंद बदमाश और आरोपियों को भेजा जाता है। इसकी पीछे सुरक्षा एक प्रमुख कारण है। यह जेल वर्ष 1982 में बनी थी। अब जेल में 1700 से अधिक सजायाफ्ता बंदी निरद्ध हैं।
जेल में विशेष सुरक्षा बैरक भी है। इस बैरक में बंदी अलग-अलग रह सकते हैं। कुख्यातों और विशेष बंदियों को इस बैरक में रखा जाता है। जेल की मुख्य दीवार के बाद एक और दीवार बनाई गई है। बैरियर पर पुलिस तैनात रहती है। एक प्लाटून पीएसी हर समय रहती है।